जयपुर , अगस्त 07 -- केद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने पीयुष गोयल ने 'मोस्ट-फेवर्ड-नेशन' का सिद्धांत और 'विशेष और विभेदक व्यवहार' का प्रावधान एक निष्पक्ष, समावेशी, भेदभाव-रहित और नियमों पर आधारित प्रणाली की नींव बताते हुए कहा हैं कि सुधारों के माध्यम से इस नींव को मजबूती प्रदान करनी चाहिए, इसे कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।

श्री गोयल शुक्रवार को यहां भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के तहत जयपुर में आयोजित 16वीं ब्रिक्स व्यापार मंत्रियों की बैठक में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में ब्रिक्स की हिस्सेदारी बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि एक पक्षवाद और बिखराव का जवाब सुदृढ़शीलता, सहयोग और सुधार है। उन्होंने भारत के उस बहुपक्षीय व्यापार तंत्र के दृष्टिकोण को पुनर्जीवित किया जो सुधार-उन्मुख, विकास-केंद्रित, सदस्यों द्वारा संचालित और सर्वसम्मति पर आधारित होना चाहिए। इस तंत्र का केंद्र विश्व व्यापार संगठन होना चाहिए, जहां 'विशेष और विभेदक व्यवहार' का प्रावधान कायम रहे और विवाद समाधान के लिए एक पूरी तरह से काम करने वाली दो-स्तरीय और बाध्यकारी व्यवस्था फिर से स्थापित की जाए।

उन्होंने भारत की अध्यक्षता के दौरान देश की प्राथमिकताओं को भी रेखांकित किया जिनमें बहुपक्षीय व्यापार तंत्र को सुदृढ़ करना, मजबूत और विविध वैश्विक मूल्य श्रृंखलाए बनाना, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों का अंतर्राष्ट्रीयकरण और उन्हें व्यापार वित्त की पहुंच दिलाना और डिजिटल रूप से दी जाने वाली सेवाएं शामिल हैं।

वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने स्वागत भाषण देते हुए, 'पधारो म्हारे देश' की भावना के साथ जयपुर में प्रतिनिधिमंडलों का स्वागत किया। उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'मानवता सर्वोपरि' के विजन से प्रेरित ब्रिक्स सहयोग में लोगों को केंद्र में रखा जाता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ब्रिक्स व्यापार का असली मकसद मानवीय है, जो सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की तरक्की, महिलाओं के नेतृत्व वाले व्यवसायों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के युवाओं के जोश में दिखाई देता है।

इस बैठक का प्रमुख नतीजा यह था कि भारत के किसानों के हितों की सशक्त रूप से रक्षा की गई। बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली पर पहला अनुबंध इस प्रणाली का समर्थन करता है जिसके केंद्र में विश्व व्यापार संगठन और विकास की प्राथमिकता है। इसमें 'स्पेशल एंड डिफरेंशियल ट्रीटमेंट' को बनाए रखने और पूरी तरह से काम करने वाली दो-स्तरीय और बाध्यकारी विवाद निपटान प्रणाली को बहाल करने की बात कही गई है। साथ ही विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक स्टॉकहोल्डिंग के मामले में नीतिगत छूट की भी बात की गई है। यह भारत के उस लगातार अपनाए जा रहे रुख को दिखाता है कि मल्टीलेटरल ट्रेडिंग सिस्टम में विकासशील देशों की खाद्य सुरक्षा और आजीविका से जुड़ी चिंताओं की रक्षा की जानी चाहिए।

इस बैठक ने छोटे व्यापारियों को एक महत्वपूर्ण प्रोत्साहन प्रदान किया। मंत्रियों ने ब्रिक्स इनवॉइस डिस्काउंटिंग मैकेनिज्म पर अध्ययन करने के लिए 'जयपुर घोषणापत्र' जारी किया और निर्यात-उन्मुख सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए क्रेडिट मूल्यांकन फ्रेमवर्क के मार्गदर्शक सिद्धांतों को स्वीकार किया। इसका उद्देश्य यह है कि किसी कंपनी का मूल्यांकन सिर्फ उसकी गिरवी रखी संपत्ति के आधार पर न होकर उसके नकदी प्रवाह के आधार पर हो। ये उपाय 2.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के वैश्विक व्यापार वित्त अंतर को कम करने में सहायक होंगे, जो विशेष रूप से छोटे व्यवसायों पर अधिक प्रभाव डालता है। यह एमएसएमई के अंतर्राष्ट्रीयकरण की कार्य योजना का हिस्सा है, जिसे एक अन्य समझौते के रूप में अपनाया गया था।

मंत्रियों ने ब्रिक्स देशों के बीच बाजार खोलने और उनमें विविधता लाने की दिशा में भी कदम उठाए। ब्रिक्स ने वैश्विक मूल्य श्रृंखला पर सामान्य समझ के लिए तीसरे अनुबंध के रूप में एक कार्य योजना को अपनाया। इसका उद्देश्य 2026-2030 के लिए वैश्विक मूल्य श्रृंखला एक्शन प्लान, ब्रिक्स टेक्निकल काउंसिल, विशेष आर्थिक क्षेत्रों के बीच सहयोग और व्यापार से संबंधित दस्तावेजों के डिजिटाइजेशन जैसे तत्वों के माध्यम से सप्लाई चेन को अधिक सशक्त, समावेशी और विविध बनाना है। चौथे अनुबंध के रूप में सीमा-पार डिजिटल सेवाओं को सुगम बनाने वाले ब्रिक्स सिद्धांत अपनाए गए, जो भरोसेमंद और सुरक्षित सेवाओं के आदान-प्रदान में सहायता करेंगे। इससे न केवल सदस्यों के बीच संतुलित और बढ़ते व्यापार को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि यह सेवाओं और मूल्य श्रृंखला को ब्रिक्स सहयोग के अगले दशक में अग्रणी बनाए रखने का मार्ग भी प्रशस्त करेगा।

बैठक का एक प्रमुख परिणाम 'ब्रिक्स आर्थिक साझेदारी 2030' की रणनीति को अंतिम रूप देना रहा। इस रणनीति में कई क्षेत्रों को शामिल किया गया है, जिनमें बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली, सेवाओं में व्यापार, डिजिटल अर्थव्यवस्था, उद्योग, नवाचार और प्रौद्योगिकी, व्यापार और निवेश, वित्तीय सहयोग और सतत् विकास शामिल हैं। इस रणनीति पर 2025 में ब्राजील की अध्यक्षता के दौरान काम आगे बढ़ाया गया और 2026 में भारत की अध्यक्षता में इसे अंतिम रूप दिया गया। मंत्री इस बात पर सहमत हुए कि वे इस रणनीति और संयुक्त घोषणापत्र की प्राथमिकताओं को सितंबर 2026 में नई दिल्ली शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स नेताओं के सामने मंजूरी के लिए पेश करेंगे।

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