, Aug. 21 -- श्री शेखावत ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) का प्रभाव जीवन के लगभग हर क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में पर्यटन क्षेत्र में एआई के उपयोग और इसे प्रभावी 'एनैबलर' के रूप में इस्तेमाल करने पर चर्चा हुई। सतत और जिम्मेदार पर्यटन को लेकर उन्होंने कहा कि भारत सहित दुनिया के कई लोकप्रिय पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की बढ़ती संख्या के कारण स्थिरता से जुड़ी चुनौतियां सामने आ रही हैं। इसलिए पर्यटन को पर्यावरण और स्थानीय परिस्थितियों के प्रति अधिक जिम्मेदार बनाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में पर्यटकों की संख्या और पर्यटक यात्राओं में तीन गुने से अधिक वृद्धि हुई है। इसके साथ हॉस्पिटैलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर तथा ट्रैवल और टूरिज्म क्षेत्र में अवसर भी बढ़े हैं। बढ़ती मांग के अनुरूप पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों को नये कौशल उपलब्ध कराना जरूरी है। चौथी प्राथमिकता के तहत ब्रिक्स देशों के बीच पर्यटकों की आवाजाही को अधिक सुगम बनाने और यात्रियों को बेहतर यात्रा अनुभव देने पर जोर दिया गया।
उन्होंने कहा कि जयपुर डिक्लेरेशन में ब्रिक्स देशों के बीच पर्यटन सहयोग का विस्तृत फ्रेमवर्क तैयार किया गया है। इसमें एआई, जिम्मेदार एवं मानव-केंद्रित पर्यटन, स्किलिंग और कैपेसिटी बिल्डिंग को प्राथमिकता दी गयी है। इसके अलावा पर्यटन को बढ़ावा देने, निवेश बढ़ाने, डेटा साझा करने और विभिन्न देशों की बेस्ट प्रैक्टिस के आदान-प्रदान को आसान बनाने पर सहमति बनी है। अलग-अलग पर्यटन उत्पादों के विकास और व्यावहारिक सहयोगात्मक पहलों को आगे बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया है।
श्री शेखावत ने कहा कि इन पहलों का लाभ पर्यटन उद्योग के साथ स्थानीय समुदायों और आम नागरिकों तक भी पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स बैठकों में लिये गये निर्णय केवल कॉन्फ्रेंस हॉल तक सीमित नहीं रहने चाहिए। इनका उद्देश्य दुनिया से आने वाले पर्यटकों को भारत की संस्कृति और विविधता को समझने तथा उसका अनुभव करने का अवसर देना भी है। उन्होंने कहा कि पर्यटन अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ने, अवसर पैदा करने और समुदायों को सशक्त बनाने के साथ विभिन्न देशों के लोगों और सभ्यताओं को करीब लाने का माध्यम होना चाहिए।
उन्होंने बताया कि गत 19 अगस्त को पर्यटन कार्य समूह की बैठक के बाद विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों को जयपुर की विरासत और संस्कृति से परिचित कराया गया। ब्रिक्स देशों के मंत्रियों के लिए हवा महल, सिटी पैलेस और आमेर किले के भ्रमण की व्यवस्था की गयी। प्रतिनिधियों को राजस्थान की पारंपरिक कला, शिल्प और हस्तकला का भी अनुभव कराया गया। इस दौरान पेंटिंग, बगरू प्रिंटिंग, वीविंग, लाख की चूड़ी बनाने तथा मिट्टी और पेपर मैशी से उत्पाद बनाने जैसी पारंपरिक कलाओं का प्रदर्शन किया गया। शेखावत ने कहा कि भारत में पर्यटन केवल स्मारकों के भ्रमण तक सीमित नहीं है। यह संस्कृति को जानने, पहचानने और उसका अनुभव करने का माध्यम भी है। विदेशी पर्यटकों को भारत की सांस्कृतिक परंपराओं और विविध विरासत से परिचित कराने में पर्यटन की महत्वपूर्ण भूमिका है।
श्री शेखावत ने कहा कि भारत ने लगभग सभी देशों के लिए ई-वीजा प्रोटोकॉल शुरू किया है। भारत में मेडिकल टूरिज्म, वेलनेस टूरिज्म, सामान्य पर्यटन और बिजनेस सहित विभिन्न श्रेणियों के वीजा के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। कुछ देशों को छोड़कर आवेदकों को भारतीय दूतावास जाने की जरूरत नहीं है। कई मामलों में 48 घंटे में वीजा मिलने की सुविधा भी उपलब्ध है।
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