भीलवाड़ा , मई 07 -- राजस्थान में बजरी खनन पर लगी रोक और सरकारी उदासीनता का खामियाजा अब आम आदमी को अपनी जान और जेब दोनों से भुगतना पड़ रहा है।

भीलवाड़ा जिले में यहां जहां एक ओर बजरी के दाम आसमान छू रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अवैध बजरी से भरे तेज रफ्तार वाहन सड़कों पर 'मौत का तांडव' कर रहे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार बजरी पर रोक के कारण राज्य भर में अवैध तस्करी का बोलबाला है। एक भवन निर्माणकर्ता ने बताया कि जो बजरी का डंपर पहले 10 हजार रुपये में आसानी से मिल जाता था, गुरुवार को उसकी कीमत 30 हजार रुपये तक पहुंच गयी है। तस्करी के कारण बजरी की मात्रा भी कम आ रही है और निर्माण लागत तीन से चार गुना बढ़ गयी है, जिससे मध्यम वर्ग का अपना घर बनाने का सपना अधूरा रह रहा है।

सू्त्रों ने बताया कि तस्करी करके लायी जा रही बजरी के डंपर और ट्रैक्टर चालक पुलिस और प्रशासन से बचने के लिए वाहनों को बेहद तेज गति से दौड़ाते हैं।

ताजा मामला बुधवार रात सदर थाना क्षेत्र का है, जहां एक डंपर ने तीन युवकों को कुचल दिया। हादसे में एक युवक की मौत हो गई और दो गंभीर रूप से घायल हैं। भीलवाड़ा में ऐसी कई मौतें पिछले कुछ महीनों में हो चुकी हैं।

मृतक के परिजनों और ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि यह अवैध खेल पुलिस और बजरी माफिया की मिलीभगत से चल रहा है। लोगों का कहना है कि पुलिस की अनदेखी के कारण ही डंपर चालक बेखौफ होकर सड़कों पर तेज रफ्तार से वाहन चलाते हैं। अवैध वसूली और आर्थिक सांठगांठ के कारण ही बजरी माफिया की आर्थिक स्थिति तो मजबूत हो रही है, लेकिन आम जनता की सुरक्षा खतरे में है।

उधर आम लोगों की मांग की है कि राज्य सरकार को बजरी के मामले में कोई सर्वमान्य और पारदर्शी फैसला लेना चाहिए। जनता की मांग है कि बजरी के दामों पर लगाम लगे ताकि निर्माण लागत घट सके।

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