नयी दिल्ली , जनवरी 12 -- कांग्रेस ने कहा है कि देश में निवेश की सुस्ती, घरेलू बचत में गिरावट और लगातार बढ़ती आर्थिक असमानता जैसी गंभीर समस्याएं हैं जिनसे निपटने के उपाय कर अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की 2026-27 के बजट में बड़ी चुनातियाँ होंगी।

कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने सोमवार को यहां एक बयान ने कहा कि संसद के बजट सत्र का कार्यक्रम घोषित हो चुका है और 2026-27 का बजट करीब बीस दिन बाद पेश किया जाना है। यह बजट 16वें वित्त आयोग की सिफ़ारिशों को भी प्रतिबिंबित करेगा, जिसकी रिपोर्ट गत 17 नवंबर को सौंपी गई थी। ये सिफ़ारिशें 2026-27 से 2031-32 की अवधि के लिए केंद्र और राज्यों के बीच कर राजस्व के बंटवारे तथा राज्यों के आपसी हिस्से से जुड़ी हैं।

उन्होने कहा कि देश आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है और निवेश की सुस्ती, घरेलू बचत में गिरावट और लगातार बढ़ती आर्थिक असमानता जैसी बड़ी चुनौतियाँ सामने हैं और यदि इन मूलभूत समस्याओं से ठोस तरीके से नहीं निपटा गया, तो उच्च जीडीपी वृद्धि और बड़े स्तर पर रोजगार सृजन कठिन हो जाएगा।

कांग्रेस ने मनरेगा से जुड़े नए कानून में 60: 40 के फार्मूले पर भी चिंता जताई और कहा कि इससे पहले ही दबाव में चल रही राज्य सरकारों पर आर्थिक बोझ बढ़ जाएगा। उनका कहना था किअर्थव्यवस्था के सामने तीन बड़ी चुनौतियां स्पष्ट हैं जिनमें पहली टैक्स में कटौती और बेहतर मुनाफे के बावजूद निजी कॉरपोरेट निवेश की रफ्तार सुस्त बनी हुई है। दूसरी, घरेलू बचत दरों में उल्लेखनीय गिरावट से निवेश क्षमता सीमित हो रही है। तीसरी, आय, संपत्ति और उपभोग से जुड़ी असमानताएं लगातार गहराती जा रही हैं।

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