गागा/अमृतसर , अगस्त 28 -- श्री अकाल तख्त साहिब से शुरू हुआ मीरी-पीरी खालसा मार्च शुक्रवार को दूसरे चरण के तहत गुरुद्वारा पातशाही नौवीं गागा (संगरूर) से पंथक परंपराओं के साथ अगले पड़ाव गुरुद्वारा पातशाही नौवीं, करहाली साहिब के लिए रवाना हुआ।
इस अवसर पर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने बाबा मखन शाह लुबाणा का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने श्री गुरु तेग बहादुर साहिब की पहचान कर ''साचा गुरु लाधो रे'' का महान संदेश संगत को दिया था।
उन्होंने कहा कि यह केवल ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि गुरु के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक है। दसवें पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के आदेश 'गुरु मानियो ग्रंथ' को जीवन का आधार बनाते हुए किसी भी देहधारी को गुरु मानने के भ्रम से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसी गुरु सिद्धांत, श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता और पंथक एकता का संदेश संगत तक पहुंचाने के लिए मीरी-पीरी खालसा मार्च निकाला जा रहा है।
ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कहा कि आज पंजाब की सबसे बड़ी चिंता नशे की मार है। नशा बेचने वालों का सामाजिक बहिष्कार करने के साथ सरकारों को भी अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए जवाबदेह बनाना होगा। उन्होंने कहा कि नशे की गिरफ्त में आये युवाओं से नफरत करने के बजाय उन्हें प्यार, सहारा और बेहतर जीवन की ओर लौटने का अवसर देना समाज की साझा जिम्मेदारी है। साथ ही बच्चों को सिख स्वरूप और गुरबाणी से जोड़ने के लिए भी परिवारों को प्रयास करने चाहिए। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि खालसा मार्च के दौरान संगत, विशेषकर बुजुर्गों से बातचीत में पंजाब की युवा पीढ़ी की नशे के कारण खराब होती स्थिति सामने आ रही है। उन्होंने कहा कि छोटी उम्र के अनेक युवा चिट्टे जैसे नशों की चपेट में आकर अपनी बहुमूल्य जिंदगी गंवा चुके हैं और यह पूरे पंजाब का दर्द है।
एडवोकेट धामी ने कहा कि मीरी-पीरी खालसा मार्च का उद्देश्य नशों के खिलाफ जागरूकता पैदा करने के साथ पंजाब की युवा पीढ़ी को बाणी और बाणे से जोड़ना, गुरसिख जीवन तथा गौरवशाली विरासत की ओर प्रेरित करना है।
उन्होंने कहा कि इसी संदेश के साथ खालसा मार्च पंजाब के गांव-गांव तक पहुंच रहा है। उन्होंने बताया कि खालसा मार्च के समापन के बाद एसजीपीसी की ओर से प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में गुरमत समागम और अमृत संचार कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे। उन्होंने कहा कि युवा पंजाब का भविष्य हैं, इसलिए हर माता-पिता और हर गुरसिख का कर्तव्य है कि वे अपने बच्चों को नशों से बचाकर गुरु से जोड़ें।
एडवोकेट धामी ने मार्च में सहयोग कर रही सभी जत्थेबंदियों और संगत का धन्यवाद भी किया।
उल्लेखनीय है कि मीरी-पीरी खालसा मार्च को लेकर संगत में काफी उत्साह देखा जा रहा है। मार्च के दौरान कई युवा जहां सिख स्वरूप में रहने का प्रण ले रहे हैं, वहीं नशों से दूर रहने का संकल्प भी कर रहे हैं।
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