चंडीगढ़ , अक्टूबर 21 -- हरियाणा सरकार ने बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। सरकार की ओर से बच्चों को लैंगिक अपराधों से सुरक्षा देने के साथ पीड़ितों को मुफ्त चिकित्सा सुविधा, परामर्श और संस्थागत सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है।
एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (पॉक्सो एक्ट) के तहत बच्चों का यौन शोषण, यौन उत्पीड़न का प्रयास और अश्लील सामग्री के लिए बच्चों का इस्तेमाल करना गंभीर अपराध हैं। इस कानून में 2019 में संशोधन भी किया गया था।
प्रवक्ता के अनुसार, यदि निर्धारित परिस्थितियों में ऐसे अपराध बच्चों के संरक्षक, देखभाल करने वाली संस्था के कर्मचारियों, लोक सेवकों, पुलिसकर्मियों या शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े व्यक्तियों द्वारा किए जाते हैं, तो कानून के तहत कम से कम 20 वर्ष के कारावास से लेकर मृत्युदंड तक का प्रावधान हो सकता है।
उन्होंने बताया कि ऐसे अपराधों को छिपाना या पुलिस को सूचना नहीं देना भी कानूनन अपराध है। इसके लिए छह महीने से एक वर्ष तक की कैद का प्रावधान है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से पीड़ित बच्चों को आवश्यक चिकित्सा, काउंसलिंग और संस्थागत सेवाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। इस दौरान बच्चे की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है, ताकि उसकी सुरक्षा और गरिमा बनी रहे।
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