देहरादून , जून 18 -- उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना की अध्यक्षता में गुरुवार को बच्चों के विरुद्ध बढ़ती हिंसा, गुमशुदगी, बाल तस्करी, अपहरण, सामाजिक उत्पीड़न तथा बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न विषयों पर राज्य स्तरीय समन्वय बैठक हुई।

बैठक के दौरान राज्य में बच्चों एवं किशोरों की सुरक्षा से संबंधित विभिन्न चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की गई। विशेष रूप से बाल तस्करी, बाल भिक्षावृत्ति, गुमशुदा एवं बरामद बच्चों, बाल श्रम, बाल यौन शोषण, किशोर अपराध, सामाजिक उत्पीड़न तथा संवेदनशील मामलों में विभागीय समन्वय को और अधिक प्रभावी बनाने के संबंध में गहन विचार-विमर्श किया गया।

बाल आयोग अध्यक्ष डॉ. खन्ना ने कहा कि बच्चों के विरुद्ध बढ़ती हिंसा एवं अपराध की घटनाएं अत्यंत चिंताजनक हैं तथा इनके प्रभावी निराकरण के लिए सभी संबंधित विभागों एवं संस्थाओं के मध्य सुदृढ़ समन्वय आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित एवं संरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

बैठक में उपस्थित अधिकारियों एवं हितधारकों द्वारा विभिन्न सुझाव प्रस्तुत किए गए, जिनके आधार पर बच्चों की सुरक्षा एवं संरक्षण को और अधिक सुदृढ़ बनाने हेतु कार्ययोजना तैयार किए जाने पर सहमति व्यक्त की गई। साथ ही संवेदनशील मामलों में त्वरित कार्रवाई, प्रभावी निगरानी तथा विभिन्न विभागों के मध्य सूचना आदान-प्रदान को मजबूत करने पर भी बल दिया गया। पुलिस विभाग से पिछले तीन वर्षाे में समस्त राज्य के गुमशुदा बच्चों का विवरण, खोने-पाने का वजह तथा वर्तमान तिथि तक गुमशुदा बच्चों के आंकड़े एवं आख्या का विवरण आयोग को उपलब्ध कराये जाने के लिए निर्देशित किया गया।

निर्देश दिये गए कि पुलिस विभाग द्वारा चलाये जा रहे विशेष अभियानों में शिक्षा विभाग के साथ सम्नवय स्थापित करते हुये उनके द्वारा संचालित ट्रैकिंग आईडी का उपयोग कर बच्चों के ड्रापआउट और अन्य जानकारी प्राप्त की जाये। पुलिस के विशेष अभियानों की जानकारी बाल कल्याण समितियों से भी सांझा की जाय, जिससे बच्चों के क्षेत्र में कार्य कर रही संस्थाओं को जोडते हुये रेस्क्यू किये गये बच्चों का फाॅलोअप लिया जा सके।

बैठक में कानून एवं व्यवस्था पुलिस उपमहानिदेशक धीरेन्द्र सिंह गुंज्याल, सचिव, बाल अधिकार संरक्षण आयोग डाॅ. शिव कुमार बरनवाल, सभी जिलों से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, अपर जिलाधिकारी एंव प्रतिनिधि, सभी जिलों के जिला प्रोबेशन अधिकारी, जिलों की बाल कल्याण समितियों के अध्यक्ष, सदस्य, बाल श्रम अधिकारी, विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि तथा बाल संरक्षण तंत्र से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण हितधारक उपस्थित रहे।

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