पटना , अक्तूबर 03 -- िहार के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को मजबूत करने में जीविका के स्वयं सहायता समूह आधारित मॉडल लगातार नए और प्रेरणादायक अवसर पैदा कर रहे हैं। इसी कड़ी में सीमांचल के चार जिलों अररिया, पूर्णिया, कटिहार और किशनगंज में गुलाबी क्रांति (बकरी पालन और मांस उत्पादन) के जरिए जीविका दीदियों ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। सीमांचल जीविका गोट प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड से जुड़ीं करीब 20,000 महिलाओं की एकजुटता ने मौजूदा समय में 15 करोड़ रुपये से अधिक के संचयी कारोबार के माध्यम से एक नया इतिहास रच दिया है।
दिसंबर 2020 में स्थापित और सितंबर 2021 से व्यावसायिक गतिविधियां शुरू करने वाली इस कंपनी ने बकरी पालन को एक संगठित और मूल्य-श्रृंखला आधारित व्यवसाय में बदलने का काम किया है। अगस्त 2026 तक कंपनी से 19,956 (लगभग 20,000) शेयरधारक जुड़ चुके हैं और कुल शेयर पूंजी 99.78 लाख रुपये तक पहुंच गई है।
आंकड़ों के अनुसार इस सीमांचल जीविका गोट प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड से जुड़ीं जीविका दीदियों की मदद से वित्तीय वर्ष 2021-22 में कंपनी का टर्नओवर 25.50 लाख रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 530.63 लाख रुपये (लगभग 5.31 करोड़ रुपये) हो गया। यानी पिछले पांच वर्षों में वार्षिक टर्नओवर में 20 गुना से भी अधिक का इजाफा हुआ है।
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