कोलकाता , जनवरी 21 -- विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे पास आ रहे हैं, वैसे-वैसे बंगाल भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को केंद्र में रखकर अपने चुनावी अभियान की रणनीति तेज कर रही है। पार्टी सूत्रों ने बताया कि राज्य नेतृत्व ने चुनावों में प्रधानमंत्री की दो दर्जन से अधिक सार्वजनिक सभाओं के लिए समय मांगा है।

योजना के मुताबिक, चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से पहले श्री मोदी की करीब दस और घोषणा के बाद भी कम से कम इतनी ही रैलियां करने की उम्मीद है।

वह पहले ही राज्य में छह सार्वजनिक सभाएं कर चुके हैं और भाजपा सूत्रों ने दावा किया है कि यह लगभग तय है कि चुनाव की तारीखों की घोषणा से पहले बाकी चार पूर्व निर्धारित रैलियां भी पूरी हो जायेंगी। पार्टी की शीर्ष नेतृत्व से भी आने वाले हफ्तों में राज्य में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की उम्मीद है।

भाजपा सूत्रों ने संकेत दिया है कि नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन महीने के आखिर में पश्चिम बंगाल का दौरा कर सकते हैं। इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह केंद्रीय बजट पेश होने के तुरंत बाद एक फरवरी को बंगाल दौरे की योजना बना रहे हैं। भाजपा का मानना है कि चुनाव से पहले वरिष्ठ नेताओं के बार-बार दौरे से जमीनी स्तर पर संगठन को और ऊर्जा मिलेगी।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, भाजपा ने चुनाव की घोषणा के दिन ही राज्य भर में कम से कम दस जगहों पर बड़ी रैलियां करने की योजना को भी अंतिम रूप दिया है। वरिष्ठ पार्टी नेताओं के साथ-साथ, पश्चिम बंगाल में एक समन्वित अभियान की शृंखला शुरू करने के लिए कई केंद्रीय मंत्रियों को एक साथ मैदान में उतारने की तैयारी है।

इस रणनीति ने हालांकि राजनीतिक बहस छेड़ दी है। आलोचकों का कहना है कि भाजपा को राज्य में केंद्रीय नेताओं पर अत्यधिक निर्भरता और बंगाल जीतने की इस 'दिल्ली-प्रेरित' योजना को लेकर पार्टी के भीतर से ही सवालों का सामना करना पड़ा है।

इससे विपक्ष के हमले तीखे हुए हैं, जिसमें सवाल उठाया गया है कि क्या राज्य नेतृत्व को अपनी संगठनात्मक ताकत और स्थानीय नेतृत्व पर भरोसा नहीं है। यह तर्क देते हुए कि प्रधानमंत्री मोदी और अन्य केंद्रीय नेताओं पर भाजपा की निर्भरता अपने नेताओं में विश्वास की कमी दर्शाती है।

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