कोलकाता , जुलाई 07 -- पश्चिम बंगाल में मंगलवार से शुरू हो रही नामांकन प्रक्रिया के बीच राज्यसभा की तीन सीटों पर होने वाले उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के जीतने की प्रबल संभावना है। विधानसभा में उसके पास स्पष्ट संख्या बल है, जबकि विभाजित तृणमूल कांग्रेस के इन चुनावों में उम्मीदवार उतारे जाने की उम्मीद नहीं है।
राजनीतिक गलियारों में भाजपा के उम्मीदवारों को लेकर अटकलें तेज हैं। सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक के बाद पूर्व तृणमूल राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर रॉय एक मजबूत दावेदार के रूप में उभरे हैं।
चुनाव आयोग ने उपचुनाव के लिए 24 जुलाई की तारीख तय की है। नामांकन 14 जुलाई तक स्वीकार किये जाएंगे और 15 जुलाई को नामांकनों की जांच होगी और नाम वापसी की अंतिम तिथि 17 जुलाई है। मतों की गिनती 24 जुलाई को शाम पांच बजे से शुरू होगी।सत्तारूढ़ पार्टी को मिली चुनावी शिकस्त के बाद पैदा हुए राजनीतिक संकट के बीच जून में पूर्व तृणमूल कांग्रेस सांसदों सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाइक के उच्च सदन और पार्टी दोनों से इस्तीफा देने के कारण ये तीनों सीटें खाली हुई थीं। सर्वश्री रॉय ने आठ जून को और बड़ाइक ने 11 जून को इस्तीफा दिया था।
भाजपा के पास वर्तमान में 294 सदस्यीय विधानसभा में 208 विधायकों के साथ सहज बहुमत है। अगर उसके सभी विधायक पार्टी के पक्ष में मतदान करते हैं, तो उसके पास तीन राज्यसभा सदस्यों को आसानी से चुनने के लिए पर्याप्त संख्या है। उनके उम्मीदवारों को क्रमशः लगभग 70, 69 और 69 वोट मिलने की उम्मीद है। विपक्ष की ओर से किसी भी तरह का क्रॉस-वोटिंग होना भाजपा की स्थिति को और मजबूत करेगा।
उधर, तृणमूल के दोनों गुटों की संयुक्त संख्या लगभग 80 विधायकों की है, लेकिन किसी भी गुट के पास अकेले एक राज्यसभा सदस्य को चुनने के लिए आवश्यक न्यूनतम संख्या नहीं है। इसके नतीजा यह है कि आंतरिक विद्रोह के बाद दो विरोधी गुटों में बंटी तृणमूल कांग्रेस के चुनाव लड़ने की संभावना नहीं है, क्योंकि उनके पास स्वतंत्र रूप से एक भी सीट सुरक्षित करने के लिए पर्याप्त विधायक नहीं हैं।
लगभग 65 विधायकों वाले एक गुट का नेतृत्व कर रहे विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने उम्मीदवार उतारने से इनकार कर दिया है। श्री ऋतब्रत ने सोमवार को कहा था, " विधानसभा में वर्तमान संख्या बल को देखते हुए तृणमूल इन तीनों में से कोई भी सीट जीतने की स्थिति में नहीं है। हमारे पास उम्मीदवार उतारने के लिए पर्याप्त विधायक नहीं हैं।"भाजपा ने अभी तक अपने उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है। हालांकि, राजनीतिक अटकलें तेज हैं कि पिछले महीने इस्तीफा देने वाले तीन पूर्व तृणमूल सांसदों में से एक या अधिक को भाजपा के टिकट पर मैदान में उतारा जा सकता है। पार्टी नेताओं का कहना है कि राज्य इकाई नामों की सिफारिश करती है, लेकिन अंतिम निर्णय भाजपा संसदीय बोर्ड का होता है।
यह अटकलें सोमवार को तब और तेज हो गयीं, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने न्यू टाउन, भवानीपुर और मिलन मेला ग्राउंड में कार्यक्रमों में शामिल होने के बाद अलीपुर के सौजन्य में पश्चिम बंगाल भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ एक बंद कमरे में बैठक की। इस उच्च स्तरीय बैठक में पूर्व तृणमूल राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय को भी आमंत्रित किया गया था, जबकि वे औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल नहीं हुए हैं। बैठक में उनकी उपस्थिति ने इन चर्चाओं को हवा दे दी है कि वे राज्यसभा उपचुनाव के लिए भाजपा के उम्मीदवारों में शामिल हो सकते हैं।
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से पता चला है कि पार्टी अगले 1-2 दिनों में अपने तीन उम्मीदवारों की घोषणा कर सकती है, जिसमें नेतृत्व का एक वर्ग श्री रॉय को सबसे आगे मान रहा है। पार्टी के आंतरिक संकट के बाद राज्यसभा और तृणमूल कांग्रेस दोनों से इस्तीफा देने वाले श्री रॉय का संसदीय कार्यकाल काफी हद तक भ्रष्टाचार के आरोपों से मुक्त रहा है। उन्होंने आर जी कर अस्पताल विवाद को लेकर राज्य प्रशासन पर सार्वजनिक रूप से सवाल भी उठाये थे, हालांकि बाद में उन्होंने अपने रुख में नरमी ला दी थी। भाजपा नेता केंद्रीय नेतृत्व के कई वरिष्ठ नेताओं के साथ उनके पुराने व्यक्तिगत संबंधों को भी उनकी संभावित उम्मीदवारी के पीछे एक बड़ा कारण मान रहे हैं।
दूसरी ओर, 10 जून को राज्यसभा से इस्तीफा देने वाली सुष्मिता देव ने पहले ही घोषणा कर दी है कि वह असम में हिमंत बिस्वा सरमा के मार्गदर्शन में काम करना चाहती हैं।
अगर भाजपा उम्मीद के मुताबिक तीनों सीटें जीत लेती है, तो पश्चिम बंगाल से राज्यसभा में उसकी ताकत 3 से बढ़कर 6 सदस्यों की हो जाएगी। यह बढ़त 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र से पहले राज्यसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की ताकत को 150 के आंकड़े के पार ले जाएगी। विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के दलों का मानना है कि सरकार इस बढ़े हुए संख्या बल का उपयोग महिला आरक्षण के क्रियान्वयन और संसदीय सीटों के परिसीमन से जुड़े महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए कर सकती है।
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