कोलकाता , मार्च 17 -- चुनाव आयोग इस सप्ताह के अंत तक एक अतिरिक्त मतदाता सूची जारी कर सकता है, जिससे लगभग 20 लाख मतदाताओं के भाग्य का निर्धारण होगा।
इन मतदाताओं की सत्यापन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार नयी सूची में यह स्पष्ट किया जाएगा कि किन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में बने रहेंगे और किन्हें हटाया जाएगा।
यह कदम उस व्यापक सत्यापन अभियान के बीच उठाया जा रहा है, जिसमें 60.06 लाख से अधिक लोगों को 'विचाराधीन' श्रेणी में रखा गया है। कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त न्यायिक अधिकारी इन मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं और तय करेंगे कि कौन वैध मतदाता है।
सूत्रों के अनुसार अब तक 21 लाख से अधिक मतदाताओं के रिकॉर्ड का सत्यापन और निस्तारण पूरा हो चुका है, जिनमें से करीब 20 लाख का विवरण पहली अतिरिक्त सूची में शामिल होने की संभावना है।
कलकत्ता उच्च न्यायालय में मंगलवार को इस प्रक्रिया की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल, मुख्य सचिव दुश्मंता नारियाला, गृह सचिव संगमित्रा घोष, पुलिस महानिदेशक सिद्धनाथ गुप्ता, मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल और विशेष पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता शामिल हुए।
सूत्रों ने बताया कि यह अतिरिक्त सूची शुक्रवार या शनिवार तक जारी की जा सकती है। जिन मतदाताओं के नाम इस सूची से बाहर होंगे, उन्हें न्यायिक विशेष न्यायाधिकरण में अपील करने का अवसर मिलेगा। उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार इन न्यायाधिकरणों के गठन की तैयारी चल रही है और इस पर निर्णय अगले दो-तीन दिनों में लिया जा सकता है।
यह सत्यापन प्रक्रिया विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान सामने आई विसंगतियों के बाद शुरू की गई है। इस कार्य में पश्चिम बंगाल के अलावा झारखंड और ओडिशा के न्यायिक अधिकारी भी लगाए गए हैं। वर्तमान में कुल 705 न्यायिक अधिकारी इस प्रक्रिया में लगे हैं।
सूत्रों ने संकेत दिया कि चुनाव से पहले कई अतिरिक्त मतदाता सूचियां जारी की जा सकती हैं। जो मतदाता नामांकन की अंतिम तिथि से पहले अंतिम सूची में शामिल हो जाएंगे, वही मतदान के पात्र होंगे।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में होंगे। पहले चरण के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 6 अप्रैल और दूसरे चरण के लिए 9 अप्रैल निर्धारित की गई है। इन तिथियों तक अंतिम रूप से शामिल मतदाता संबंधित चरण में मतदान कर सकेंगे।
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