कोलकाता , सितंबर 20 -- पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने पश्चिम बंगाल में मुर्शिदाबाद की रेजीनगर विधानसभा सीट पर चुनावी मुकाबले की तैयारी शुरू कर दी है।
श्री चौधरी ने रविवार को बेलडांगा स्थित पार्टी कार्यालय में रणनीति बैठक की। इसमें कालीगंज की विधायक अलिफा अहमद और जलंगी के विधायक बाबर अली के अलावा अन्य स्थानीय नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए।
सूत्रों ने बताया कि छह अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव के लिए प्रचार की रणनीति तैयार करने के उद्देश्य से यह बैठक बुलाई गयी थी। नतीजे नौ अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। श्री चौधरी ने अपने विधानसभा क्षेत्र में प्रचार भी शुरू कर दिया है। श्री अहमद और श्री अली ने रविवार को श्री चौधरी को सुश्री बनर्जी की पार्टी को आवंटित चुनाव चिह्न फुटबॉल भेंट किया।
गौरतलब है कि श्री हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद रेजीनगर सीट खाली हुई थी। श्री कबीर ने रेजनीगर और नाओदा दो सीटों के चुनाव जीती थी और फिर रेजीनगर सीट छोड़ दी थी।
कालीनघाट खेमे द्वारा पंचायत स्तर पर अपनी चुनावी रणनीति तैयार किए जाने की जानकारी है। इसी बीच, मुर्शिदाबाद के सांसद अबू ताहेर खान के भतीजे सफीउज्जमान हबीब और उनके समर्थक रविवार को रेजीनगर के कुछ हिस्सों में बागी तृणमूल गुट के लिए प्रचार करते दिखाई दिए। वे विभिन्न क्षेत्रों में दीवार लेखन की भी निगरानी कर रहे थे।
सुश्री बनर्जी की पार्टी ने कहा कि वह विपक्ष के प्रचार को लेकर ज्यादा चिंतित नहीं है। श्री चौधरी का समर्थन करते हुए श्री अहमद ने कहा, "रेजीनगर की जनता ही अंतिम फैसला करेगी। वे तय करेंगे कि ममता सरकार बेहतर थी या पिछले चार महीने की भाजपा सरकार। इसलिए हमें उपचुनाव को लेकर 100 प्रतिशत भरोसा है।"श्री अली ने कहा कि भाजपा ने कई वादे किए थे, लेकिन उनमें से बहुत कम पूरे हुए। उन्होंने कहा, "सुश्री बनर्जी का नाम हमारी पार्टी से जुड़ा हुआ है। हमें नहीं लगता कि लोगों को चुनाव चिह्न पहचानने में कोई परेशानी होगी। श्री चौधरी इस नए चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ने वाले पहले उम्मीदवार हैं और हमें उम्मीद है।"श्री चौधरी ने खुद स्वीकार किया है कि इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को संगठनात्मक बढ़त हासिल है, लेकिन उन्होंने कहा कि वह प्रचार में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते। उनके चुनाव लड़ने का फैसला शनिवार को नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख पर काफी अनिश्चितता के बाद हुआ। चौधरी ने पहले घोषणा की थी कि वह चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन कुछ ही घंटे बाद अपना फैसला बदल दिया। उन्होंने कहा कि बनर्जी से बातचीत के बाद उन्होंने अपने फैसले पर दोबारा विचार किया। उन्होंने कहा कि जब तक पार्टी का एक भी कार्यकर्ता उनके साथ खड़ा रहेगा, तब तक वह चुनाव मैदान में बने रहेंगे।
भाजपा उम्मीदवार शखारोव सरकार ने इस घटनाक्रम पर तंज कसते हुए कहा कि बार-बार राजनीतिक फैसले बदलने से मतदाताओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा, "रेजीनगर को उद्योग की जरूरत है और केवल भाजपा ही यह उपलब्ध करा सकती है।" उन्होंने कहा कि लोग पहले ही अपना मन बना चुके हैं।
वामपंथी खेमा भी सक्रिय है। वर्ष 2011 में रेजीनगर को विधानसभा क्षेत्र बनाए जाने के बाद पहली बार मार्क्सवादी कम्युनिस्टा पार्टी (माकपा) ने यहां अपना उम्मीदवार उतारा है। आरएसपी ने भी अपना उम्मीदवार मैदान में उतारा है।
माकपा उम्मीदवार सईद असद अली वकील हैं। वह कई वर्षों से वामपंथ से जुड़े रहे हैं, लेकिन 2016 में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए थे और 2018 में फिर माकपा में लौट आए। भाजपा ने उनके बार-बार राजनीतिक दल बदलने को लेकर उन्हें निशाना बनाया है।
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