कोलकाता , मई 18 -- पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांगों को पूरा करने के उद्देश्य से सोमवार को बहुप्रतीक्षित सातवें वेतन आयोग के गठन की घोषणा की।

यह फैसला नबन्ना में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया। इस कदम को राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद कार्यभार संभालने के बाद से नयी सरकार के सबसे बड़े प्रशासनिक फैसलों में से एक के रूप में देखा जा रहा है।

राज्य की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कैबिनेट बैठक के बाद एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, "सरकार ने राज्य सरकार के कर्मचारियों की मौजूदा वेतन संरचना की समीक्षा करने और उसमें व्यापक संशोधन करने के लिए सातवें राज्य वेतन आयोग का गठन करने का फैसला लिया है।" उन्होंने कहा, "कर्मचारियों के वित्तीय लाभों और सेवा शर्तों को बेहतर बनाने के लिए एक रूपरेखा तैयार करने हेतु सरकार द्वारा जल्द ही एक उच्च-स्तरीय समिति या आयोग का गठन किया जाएगा।"गौरतलब है कि सातवें वेतन आयोग को लागू करने का मुद्दा, पश्चिम बंगाल में हाल ही में खत्म हुए विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा के बड़े वादों में से एक था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने सरकारी कर्मचारियों से बार-बार वादा किया था कि अगर राज्य में भाजपा की सरकार बनी तो वे नया वेतन आयोग लागू करेंगे। बंगाल में चुनावी रैलियों के दौरान श्री मोदी ने राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए भाजपा की तरफ से किए गये बड़े "वादों" में सातवें वेतन आयोग के गठन को भी शामिल किया था।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि अगर राज्य में भाजपा सत्ता में आती है, तो 45 दिनों के अंदर वेतन आयोग लागू कर दिया जाएगा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सोमवार को कैबिनेट का जो फैसला आया है, वह सरकार की उस चुनावी वादे को सत्ता संभालने के तुरंत बाद ही पूरा करने की कोशिश को दिखाता है।

अर्थशास्त्रियों और प्रशासनिक विशेषज्ञों के मुताबिक, सातवें वेतन आयोग को लागू करने से राज्य के कर्मचारियों की सैलरी के ढांचे में बड़े बदलाव आने की उम्मीद है। इसमें बेसिक सैलरी के साथ-साथ महंगाई भत्ता (डीए), मकान किराया भत्ता और दूसरे फायदों में भी बदलाव शामिल है। इस कदम से स्वायत्त संस्थाओं के कर्मचारियों, पेंशनरों और सरकारी मदद से चलने वाली संस्थाओं के कर्मचारियों को भी सैलरी, पेंशन और सेवानिवृत्ति के फायदों में बदलाव के ज़रिए फायदा होने की उम्मीद है। राज्य सरकार के कर्मचारियों के कुछ वर्गों ने इस घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि इस फैसले से उनकी लंबे समय की आर्थिक सुरक्षा और खरीदने की क्षमता में काफी सुधार हो सकता है।

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