कोलकाता , अक्टूबर 12 -- कलकत्ता उच्च न्यायालय ने साल के अंत में पश्चिम बंगाल के सात प्रमुख नगर निकायों में होने वाले चुनावों से पहले इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) मशीनों की कमी को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सोमवार को आयोग को निर्देश दिया कि वह हलफनामा दाखिल कर स्पष्ट करे कि क्या ईवीएम और वीवीपैट मशीनों से एकत्र मतदान के आंकड़ों को अलग-अलग हार्ड डिस्क में सुरक्षित रखा जा सकता है और क्या कानून के तहत ऐसी प्रक्रिया की अनुमति है।
आयोग के सूत्रों के अनुसार, चुनावों की औपचारिक अधिसूचना अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में जारी किए जाने की संभावना है। मतदान नवंबर के अंतिम सप्ताह में कराने की योजना है, जबकि नतीजे दिसंबर की शुरुआत में घोषित किए जा सकते हैं।
पहले चरण में सात नगर निकायों में चुनाव होने की संभावना है। इनमें कोलकाता नगर निगम, हावड़ा नगर निगम, बाली, हल्दिया, धूपगुड़ी, कालिम्पोंग और कर्सियांग शामिल हैं।
इन नगर निकायों में कुल 6,301 मतदान केंद्र बनाए जाने की संभावना है। चुनाव की तैयारियां पहले ही शुरू हो चुकी हैं।
हालांकि, मतदान संबंधी उपकरणों की कमी एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती बनकर सामने आई है।
राज्य के 12 जिलों में कम से कम 15 नगर निकायों में फिलहाल निर्वाचित नागरिक निकाय बोर्ड नहीं हैं और उनका संचालन प्रशासकों के माध्यम से किया जा रहा है। सहावड़ा नगर निगम में चुनाव कराने में सबसे अधिक देरी हुई है। यहां पिछले 13 वर्षों से चुनाव नहीं हुए हैं। हावड़ा में पिछला नगर निकाय चुनाव वर्ष 2013 में हुआ था और निर्वाचित बोर्ड का कार्यकाल वर्ष 2018 में समाप्त हो गया था।
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