कोलकाता , मई 18 -- पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी सोमवार को अपनी नई मंत्रिपरिषद की दूसरी बैठक करेंगे, जिसमें राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता (डीए) और सातवें वेतन आयोग को लागू करने जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
राज्य भर के सरकारी कर्मचारी लंबे समय से बकाया डीए और केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बराबर वेतन की मांग कर रहे हैं।
गौरतलब है कि नई भाजपा सरकार की मंत्रिपरिषद की पहली बैठक पिछले सोमवार को नबन्ना में हुई थी। बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी कि मंत्रिपरिषद की अगली बैठक आगामी सोमवार को होगी और संकेत दिया था कि डीए और वेतन आयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
बैठक से पहले, बंगाल शिक्षक और कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सरकार से डीए में कम से कम 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने और इसे बढ़ाकर 30 प्रतिशत करने का आग्रह किया है।
संगठन ने लिखा कि शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को अभी 18 प्रतिशत की दर से डीए मिल रहा है, जिससे वे अभी भी केंद्र सरकार के कर्मचारियों से 42 प्रतिशत पीछे हैं। डीए का मुद्दा कई सालों से राज्य सरकार के कर्मचारियों और पिछली सरकार के बीच विवाद का एक बड़ा कारण बना हुआ है।
कर्मचारी संगठनों ने बकाया डीए के भुगतान और केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बराबर वेतन की मांग को लेकर कलकत्ता उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया था। उन्होंने पिछली सरकार पर जानबूझकर डीए का भुगतान रोकने का बार-बार आरोप लगाया था।
शीर्ष न्यायालय ने इस साल पांच फरवरी को अपने फैसले में कहा था कि राज्य सरकार को 2009 से 2019 के बीच बकाया डीए का 25 प्रतिशत भुगतान करना चाहिए। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया था कि एक समिति छह मार्च तक इस बारे में ब्योरा जमा करे कि बाकी बकाया किस तरह और किस समय-सारिणी के अनुसार चुकाया जाएगा। आदेश के अनुसार, बाकी बचे 75 प्रतिशत की पहली किस्त 31 मार्च तक दी जानी थी।
समय सीमा खत्म होने से पहले हालांकि तत्कालीन राज्य सरकार ने विभिन्न कठिनाइयों का हवाला देते हुए भुगतान के लिए और समय मांगने के लिए उच्चतम न्यायालय का रुख किया था। विधानसभा चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा से ठीक पहले, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पर घोषणा की थी कि राज्य सरकार के कर्मचारियों को मार्च 2026 से आरओपीए -2009 के तहत बकाया डीए मिलना शुरू हो जाएगा।
बाद में हालांकि कई कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि समय सीमा बीत जाने के बाद भी, वादे के अनुसार भुगतान नहीं किया गया। कुछ कर्मचारियों ने यह भी दावा किया कि उन्हें बताया गया था कि डीए का एक हिस्सा उनके भविष्य निधि खातों में जमा किया जाएगा, लेकिन उन्हें अभी तक वह राशि नहीं मिली है।
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद, सरकारी कर्मचारी अब इस लंबे समय से चले आ रहे मुद्दे के समाधान के लिए नए प्रशासन की ओर देख रहे हैं। अब सभी की नज़रें आज होने वाली मंत्रिपरिषद बैठक पर टिकी हैं, कि क्या नई सरकार डीए और बकाया एरियर के संबंध में कोई ठोस निर्णय लेगी।
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