कोलकाता , जून 23 -- पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की सरकार द्वारा अल्पसंख्यक विकास के लिए 2,165.42 करोड़ रुपये का बजट प्रस्ताव रखने के एक दिन बाद मंगलवार को भाजपा विधायक ने एक धर्मनिरपेक्ष राज्य में अलग अल्पसंख्यक मामलों के विभाग की जरूरत पर सवाल उठाया।

विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए बारानगर के विधायक सजल घोष ने कहा, "कल पेश हुए बजट के बाद, कई लोगों ने मुझसे पूछा कि अल्पसंख्यकों के लिए क्या किया गया है। मैं सरकार से पूछना चाहता हूं कि अगर देश सचमुच धर्मनिरपेक्ष है तो क्या अल्पसंख्यक मामलों के विभाग की कोई ज़रूरत है? लोगों को लगातार अल्पसंख्यक एवं बहुसंख्यक के रूप में पहचानकर हम खुद नागरिकों के बीच बंटवारा पैदा कर रहे हैं।"श्री घोष की यह टिप्पणी विपक्ष की उस कड़ी आलोचना के बीच आई है जिसमें विपक्ष ने अल्पसंख्यक कल्याण के लिए निर्धारित फंड में भारी कटौती का आरोप लगाया है। सोमवार को वित्त मंत्री स्वप्न दासगुप्ता ने घोषणा की थी कि सरकार चालू वित्त वर्ष में अल्पसंख्यकों के विकास के लिए 2,165.42 करोड़ रुपये आवंटित करेगी।

बजट प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया करते हुए, वामपंथी विधायकों और इंडियन सेक्युलर फ्रंट के विधायक नौशाद सिद्दीकी ने भाजपा सरकार पर अल्पसंख्यक समुदायों को हाशिए पर धकेलने का आरोप लगाया।

श्री सिद्दीकी ने दावा किया कि आवंटन में कटौती से आर्थिक रूप से कमज़ोर और हाशिए पर रह रहे अल्पसंख्यक समूहों पर बुरा असर पड़ेगा। उन्होंने बताया कि ममता बनर्जी सरकार के तहत अल्पसंख्यक विकास के लिए पिछला आवंटन 5,713 करोड़ रुपये था और आरोप लगाया कि मौजूदा बजट में इस आंकड़े में भारी कटौती की गई है।

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