सिलीगुड़ी , अप्रैल 20 -- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण का प्रचार अभियान जैसे-जैसे अपने चरम पर पहुँच रहा है, राज्य के उत्तरी हिस्से में झड़पों, आरोपों-प्रत्यारोपों और प्रशासनिक अनियमितताओं की रिपोर्टें मिल रही हैं।
राज्य की दो प्रमुख प्रतिद्वंद्वी पार्टियां तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एक-दूसरे पर कई गंभीर आरोप लगा रही हैं। भाजपा का आरोप है कि कुछ बूथ स्तर के अधिकारी (बीएलओ), जो कथित तौर पर तृणमूल कांग्रेस के प्रभाव में हैं, चुनाव आयोग की अनुमति के बिना पार्टी के बैनर तले वोटर पर्चियां बांट रहे हैं। कई जगहों पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने इस पर आपत्ति जताते हुए हस्तक्षेप किया है।
दूसरी ओर, तृणमूल ने भाजपा पर महिलाओं के बीच 'गारंटी कार्ड' बांटने का आरोप लगाया है। तृणमूल का कहना है कि राज्य सरकार की 'लक्ष्मी भंडार' योजना के जवाब में भाजपा तीन हजार रुपये महीने की सहायता का वादा कर रही है और इस बहाने बैंक खातों की जानकारी जुटाई जा रही है। इस मुद्दे को लेकर पहाड़ों से लेकर मैदानों तक विरोध प्रदर्शन हुए हैं।
इस बीच, चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मचारियों और पुलिस कर्मियों के मतदान को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। मालदा जिले में आरोप लगे हैं कि कर्मचारियों को तय केंद्रों पर वोट डालने के लिए कहा गया है, लेकिन सही जानकारी न होने के कारण असंतोष फैल गया है।
इंग्लिश बाजार में तृणमूल और भाजपा दोनों के उम्मीदवारों ने इन कर्मचारियों का समर्थन करते हुए निष्पक्ष मतदान प्रक्रिया की मांग की है। सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे वीडियो भी सामने आए हैं जिनमें मतपेटियों को बिना सील किए ले जाते हुए देखा गया, हालांकि विरोध के बाद अधिकारियों ने उन्हें सुरक्षित तरीके से सील कर दिया।
बीरभूम जिले की सूरी विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने कर्मचारियों के मतदान में भारी कुप्रबंधन का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि चुनाव ड्यूटी पर तैनात कई पुलिस कर्मियों को मतपत्र ही नहीं मिले हैं, जिससे हेरफेर की आशंका बढ़ गई है। इसकी शिकायत चुनाव आयोग से की गई है। शिकायतों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) मनोज अग्रवाल ने कहा कि मामले की समीक्षा की जा रही है।
कूचबिहार में तृणमूल उम्मीदवार और मंत्री उदयन गुहा ने चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि भाजपा कार्यकर्ता आचार संहिता का उल्लंघन कर गारंटी कार्ड बांट रहे हैं। उन्होंने आशंका जताई कि तृणमूल नेताओं को चुनाव से दूर रखने के लिए गिरफ्तार करने की योजना बनाई जा रही है। सिलीगुड़ी में कलाकार, शिक्षक, लेखक आदि चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं। उनका तर्क है कि अगर बड़ी संख्या में पात्र मतदाता मत देने से वंचित रह जाते हैं, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरा है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित