कोलकाता , जून 18 -- पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर.एन. रवि ने गुरुवार को राज्य में भाजपा सरकार के कामकाज की तारीफ़ की। उन्होंने कानून-व्यवस्था बहाल करने, अवैध घुसपैठ रोकने, महिलाओं की सुरक्षा बेहतर करने और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने की सरकार की कोशिशों का ज़िक्र किया।

राज्यपाल ने नयी सरकार के तहत पहले बजट सत्र के शुरुआती दिन राज्य विधानसभा को संबोधित करते हुए सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की भी सराहना की। बजट सत्र का पहला चरण 25 जून तक चलेगा।

वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता 22 जून को वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगे।

अपने संबोधन में श्री रवि ने कहा कि राज्य सरकार घुसपैठ की वजह से होने वाले जनसांख्यिकी बदलावों को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है और संवेदनशील इलाकों में सीमा पर तारबंदी लगाने के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को ज़मीन सौंपने की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर चुकी है।

उन्होंने कहा, "सरकार घुसपैठ रोकने और सीमा सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।" साथ ही उन्होंने बताया कि राज्य में कानून का राज स्थापित करने के लिए निर्णायक कदम उठाए गए हैं।

राज्यपाल ने महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों के प्रति प्रशासन की "ज़ीरो-टॉलरेंस" (सख्त) नीति पर भी ज़ोर दिया।

श्री रवि ने दावा किया कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में फैले जबरन वसूली के रैकेट, आपराधिक गिरोहों और संगठित अपराधों पर प्रभावी ढंग से रोक लगाई गई है। उनके संबोधन में नागरिकों के बीच डर की जगह भरोसा और आत्मविश्वास पैदा करने के सरकार के राजनीतिक नारे की झलक भी दिखी।

मानव तस्करी से निपटने और अवैध कब्ज़े वाली ज़मीन को वापस लेने के उपायों को भी सरकार की बड़ी उपलब्धियों के तौर पर रेखांकित किया गया।

श्री रवि ने महिलाओं के लिए आर्थिक मदद वाले प्रोग्राम - जैसे 'अन्नपूर्णा भंडार' स्कीम - जैसी कल्याणकारी योजनाओं की तारीफ़ की और घोषणा की कि राज्य 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति' (एनईपी) लागू करेगा।

उन्होंने आगे कहा कि रोज़गार पैदा करने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को फिर से मज़बूत करने के मकसद से, खासकर उत्तरी बंगाल में बंद पड़े चाय बागानों को फिर से खोलने की कोशिशें चल रही हैं।

पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए, राज्यपाल ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार भ्रष्टाचार में डूबी हुई थी और आम नागरिकों को न्याय दिलाने में नाकाम रही थी। उन्होंने दावा किया कि जान-बूझकर की गई देरी और प्रशासनिक सुस्ती की वजह से कई विकास परियोजनाएं प्रभावित हुईं।

खास तौर पर चिंगरीघाटा मेट्रो प्रोजेक्ट का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के समय इसका काम रुका हुआ था, जिससे विकास में रुकावट आई और लोगों को परेशानी हुई।

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