सिलीगुड़ी , अक्टूबर 31 -- पश्चिम बंगाल के पर्यटन मंत्री मनोज कुमार उरांव ने संकोश नदी के किनारे और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे भूटान में ग्लेशियर झील के फटने के कारण बहकर आई मरी हुई मछलियों को न खाएं। उन्होंने चेतावनी दी है कि ऐसा करने से स्वास्थ्य को गंभीर खतरा हो सकता है।
विधानसभा में कुमारग्राम का प्रतिनिधित्व करने वाले श्री ओरांव ने बताया कि शनिवार सुबह अलीपुरद्वार जिले की संकोश नदी में कई टन मरी हुई मछलियां तैरती हुई पाई गईं। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों ने बड़ी मात्रा में इन मछलियों को इकट्ठा किया और संकोश, कुमारग्राम, तूफानगंज तथा आसपास के इलाकों के बाजारों में ले गए।
मंत्री ने लोगों से अपील की है कि वे तब तक मछली न खरीदें और न खाएं जब तक कि विशेषज्ञ यह निर्धारित नहीं कर लेते कि ये इंसानों के खाने के लिए सुरक्षित हैं या नहीं। उन्होंने व्यापारियों से भी आग्रह किया कि वे नदी के प्रभावित हिस्से से पकड़ी गई मछलियों को न बेचें।
श्री ओरांव ने कहा, "मछलियों के मृत होने के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। उचित जांच के बिना यह तय नहीं किया जा सकता कि इन्हें खाना इंसानों के लिए सुरक्षित है या नहीं।" श्री ओरांव ने चेतावनी देते हुए कहा कि दूषित मछली खाने से गंभीर बीमारी हो सकती है और कुछ मामलों में तो यह जानलेवा भी साबित हो सकती है।
उन्होंने बताया कि शुक्रवार आधी रात के आसपास भूटान से आया बाढ़ का पानी इस इलाके में पहुंचने के बाद नदी के पानी का रंग असामान्य रूप से गहरा हो गया।
शुक्रवार की आधी रात से आज सुबह पांच बजे के बीच बड़ी संख्या में मछलियां मृत पाई गईं। रात और तड़के कई लोग उन्हें इकट्ठा करने के लिए नदी में उतरे थे।
श्री ओरांव ने बताया कि उन्होंने नदी के किनारे का दौरा किया और वहां की स्थिति को चिंताजनक पाया। उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर मरी हुई मछलियों को इकट्ठा किया और यह सुनिश्चित किया कि इन मछलियों को जमीन के नीचे दबा दिया जाए ताकि वे खाद्य श्रृंखला में शामिल न हो सकें। मछलियों की इतनी बड़ी संख्या में मौत के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है।
मंत्री ने कहा कि अचानक आई बाढ़ के बाद पानी की स्थिति में हुए बदलाव से यह घटना हो सकती है। उन्होंने कहा कि पानी में घुली ऑक्सीजन की कमी, रासायनिक संदूषण, कीटनाशक या बहकर आए अन्य प्रदूषक तत्व भी इसके संभावित कारण हो सकते हैं।
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