सिलीगुड़ी , अगस्त 04 -- पश्चिम बंगाल के श्रम मंत्री अर्जुन सिंह ने कहा है कि राज्य सरकार राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के समक्ष श्रम विभाग का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक समर्पित कानूनी टीम गठित करेगी, जिसका उद्देश्य चाय बागान श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करना और चूक करने वाले बागान मालिकों के खिलाफ कार्रवाई करना है।
मंगपू स्थित सिन्कोना बागान का दौरा करने के बाद, पश्चिम बंगाल के श्रम मंत्री ने सोमवार शाम दार्जिलिंग में चाय क्षेत्र की समीक्षा बैठक की। इसके बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि सरकार के ध्यान में आया है कि कुछ चाय बागान मालिक श्रमिकों के भविष्य निधि (पीएफ), ग्रेच्युटी और अन्य वैधानिक बकाये चुकाने में नाकाम रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी श्रम विभाग ऐसे चूक करने वाले प्रबंधनों पर शिकंजा कसता है, तो उनमें से कुछ एनसीएलटी की शरण लेकर कानूनी ढाल हासिल कर लेते हैं, जिससे मजदूरों के बकाये की वसूली में देरी होती है।
श्री सिंह ने कहा, "इन मामलों से मजबूती से निपटने के लिए राज्य सरकार ने एक समर्पित कानूनी टीम बनाने का फैसला किया है, जो एनसीएलटी में श्रम विभाग का पक्ष रखेगी।"इस बैठक में पर्वतीय क्षेत्र के चालू और बंद पड़े दोनों तरह के चाय बागानों के हालात का जायजा लिया गया। हालिया सर्वेक्षण के हवाले से श्रम विभाग ने पाया कि कई जगह श्रमिकों को लंबित पीएफ और ग्रेच्युटी जैसे वाजिब हकों से महरूम रखा गया है।
श्रम मंत्री ने सख्त लहजे में कहा, "श्रमिकों के जायज अधिकारों पर डाका डालने वालों के खिलाफ सरकार सख्त से सख्त कदम उठायेगी।"At the same time, he stressed that the government's approach would be balanced. "Those who are running tea gardens responsibly and looking after the welfare of workers will receive the government's full support. Our action is only against those who are violating labour laws and depriving workers of their dues," he said. The minister further alleged that some tea estate owners had continued operations by "managing the previous government" and claimed that in certain cases plantations were operating on leased land despite lease renewals not being in place.उन्होंने जोर देकर यह भी कहा कि सरकार का रुख संतुलित रहेगा, उन्होंने कहा, "जो लोग जिम्मेदारी से चाय बागान चला रहे हैं और श्रमिकों के कल्याण का ख्याल रख रहे हैं, उन्हें सरकार का पूरा समर्थन मिलेगा। हमारी कार्रवाई केवल उन लोगों के खिलाफ है, जो श्रम कानूनों का उल्लंघन कर रहे हैं और श्रमिकों को उनके बकाये से वंचित कर रहे हैं।"मंत्री ने आरोप लगाया कि कुछ चाय बागान मालिकों ने पिछली सरकार को मिलाकर कर परिचालन जारी रखा। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ मामलों में लीज का नवीनीकरण न होने के बावजूद बागान पट्टे की जमीन पर चल रहे थे।
चाय पर्यटन पर राज्य की नीति का जिक्र करते हुए श्री सिंह ने कहा कि पिछली सरकार ने पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों के लिए चाय बागान की 30 प्रतिशत तक जमीन के इस्तेमाल की अनुमति दी थी। उनके अनुसार, इसने कुछ प्रमोटरों को चाय बागान चलाने और श्रमिकों के कल्याण को सुनिश्चित करने के बजाय होटल और रिसॉर्ट विकसित करने पर अधिक ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने पर्यटन के लिए चाय बागान की जमीन का उपयोग करने की अनुमेय सीमा को 30 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। मंत्री के अनुसार, सख्त नीति और सरकार के हालिया प्रवर्तन उपायों ने चूक करने वाले कुछ चाय बागान मालिकों को 'असहज' कर दिया था।
लॉन्गव्यू टी एस्टेट के खिलाफ हालिया कार्रवाई का हवाला देते हुए श्री सिंह ने कहा कि मालिक को तीन करोड़ रुपये से अधिक के कथित पीएफ चूक के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और बाद में उसने बकाया राशि जमा कर दी थी। उन्होंने कहा कि जब तक श्रमिकों का बकाया पूरी तरह से चुकता नहीं हो जाता, तब तक सरकार कानूनी कार्रवाई जारी रखेगी।
श्री सिंह ने कहा, "राज्य और केंद्र दोनों उत्तर बंगाल में चाय उद्योग को पुनर्जीवित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमारा उद्देश्य उत्तर बंगाल में चाय उद्योग के गौरव को बहाल करना है। हम उसी दिशा में काम कर रहे हैं, साथ ही यह भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि चाय बागान श्रमिकों के अधिकार और कल्याण पूरी तरह सुरक्षित रहें।"It may be noted that workers of Longview Tea Estate suspended their hunger strike on Monday following the payment of long-pending provident fund (PF) dues and wages, marking a significant breakthrough in their agitation.उल्लेखनीय है कि लंबे समय से लंबित भविष्य निधि (पीएफ) बकाये और मजदूरी के भुगतान के बाद सोमवार को लॉन्गव्यू टी एस्टेट के श्रमिकों ने अपनी भूख हड़ताल स्थगित कर दी, जो उनके आंदोलन में एक महत्वपूर्ण सफलता है।
श्रमिकों के अनुसार, उनकी मजदूरी से काटे गये कर्मचारियों के पीएफ अंशदान के रूप में कुल 3.32 करोड़ रुपये अब पूरी तरह से जमा कर दिये गये हैं। भूख हड़ताल के दौरान श्रमिकों की मजदूरी और कर्मचारियों के वेतन मद में 1.28 करोड़ रुपये का भुगतान भी किया गया था।
पिछले वर्ष तक के पीएफ बकाये के मद में लगभग एक करोड़ रुपये पहले ही जमा किये जा चुके थे, जबकि प्रबंधन ने सोमवार को नियोक्ता के पीएफ अंशदान के रूप में 31 लाख रुपये और जमा किये। श्रमिकों का दावा है कि कुल मिलाकर लगभग 5.90 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
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