नंदीग्राम , अक्टूबर 04 -- पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने छह अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव से ठीक पहले रविवार को पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नंदीग्राम में प्रचार के दौरान पैर में फ्रैक्चर होने के 2021 के दावे को लेकर उन पर नया हमला बोला है।
श्री अधिकारी ने तेंगुआ मोड़ से नंदीग्राम अस्पताल तक लगभग तीन किलोमीटर लंबे रोड शो को संबोधित करते हुए 2021 के उस दिन का हवाला दिया, जब सुश्री बनर्जी इस चुनाव क्षेत्र में चुनाव प्रचार के दौरान घायल हो गयी थीं। उन्होंने सवाल किया कि क्या 10 मार्च को "पश्चिम बंगाल झूठ दिवस" के रूप में मनाया जाना चाहिए।
श्री अधिकारी ने सुश्री बनर्जी पर 2021 के चुनाव प्रचार के दौरान फ्रैक्चर होने का झूठा दावा करने का अपना आरोप दोहराते हुए पूछा, "क्या 10 मार्च को पश्चिम बंगाल झूठ दिवस के रूप में मनाना उचित होगा?" रोड शो के दौरान श्री अधिकारी के साथ उनके भाई दिव्येंदु अधिकारी, मंत्री अरूप कुमार दास और भाजपा उम्मीदवार हसीरानी रथ भी मौजूद थे।
मुख्यमंत्री ने शनिवार को आरोप लगाया था कि 2021 में पैर में फ्रैक्चर का सुश्री बनर्जी का दावा झूठा था और उन्होंने घोषणा की कि राज्य सरकार उपचुनाव के बाद इस मामले की जांच शुरू करेगी। उन्होंने नबन्ना में चिकित्सा दस्तावेज दिखाते हुए दावा किया कि बांगुर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज की 11 मार्च, 2021 की रेडियोडायग्नोसिस रिपोर्ट में कहा गया है कि फ्रैक्चर का कोई सबूत नहीं था।
श्री अधिकारी ने दस्तावेज दिखाते हुए कहा, "2021 के चुनाव के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री का पैर टूटने का दावा कर पूरे नंदीग्राम का अपमान किया गया था।"श्री अधिकारी ने 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम में सुश्री बनर्जी को हराया था। 2026 के विधानसभा चुनाव में, उन्होंने भवानीपुर और नंदीग्राम दोनों जगहों से चुनाव लड़ा और दोनों सीटों पर जीत हासिल की। बाद में उन्होंने भवानीपुर सीट अपने पास रखी और नंदीग्राम सीट से इस्तीफा दे दिया था, जिससे छह अक्टूबर को उपचुनाव कराना आवश्यक हो गया।
श्रीमती रथ के लिए वोट मांगते हुए श्री अधिकारी ने कहा कि भाजपा उम्मीदवार की जीत मतदान के प्रतिशत पर निर्भर करेगी। उन्होंने कहा, "जितना अधिक मतदान होगा, जीत का अंतर उतना ही बड़ा होगा।"उन्होंने यह भी दावा किया कि लगभग 72,000 अल्पसंख्यक मतदाताओं वाले नंदीग्राम में रविवार के जुलूस में अल्पसंख्यक समुदाय के 1,000 से अधिक लोग शामिल हुए थे और विश्वास व्यक्त किया कि उनमें से एक वर्ग भाजपा को वोट देगा।
इस बीच, रेजीनगर में भी चुनाव प्रचार तेज हो गया, जहां पूर्व विधायक हुमायूं कबीर के इस्तीफे के कारण उपचुनाव कराना पड़ा। रेजीनगर के 65 प्रतिशत से अधिक मतदाता अल्पसंख्यक हैं।
श्री कबीर ने पिछले विधानसभा चुनाव में आम जनता उन्नयन पार्टी के टिकट पर अल्पसंख्यक वोटों का एक बड़ा हिस्सा हासिल कर यह सीट जीती थी। उन्होंने अब अपने बेटे गुलाम नबी आजाद (रॉबिन) को पार्टी उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारा है, लेकिन इस मुकाबले को व्यापक रूप से खुद कबीर के राजनीतिक वजूद की परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।
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