कृष्णनगर , अगस्त 19 -- तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ एक शिकायत के सिलसिले में बार-बार पेश न होने पर कृष्णनगर की एक अदालत ने बुधवार को उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया।

न्यायिक मजिस्ट्रेट तृतीय न्यायालय के न्यायाधीश दिव्येंदु दास ने यह वारंट जारी किया है। उन्होंने सुश्री मोइत्रा को 28 अगस्त तक अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है।इस शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उनकी सोशल मीडिया टिप्पणी से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है और सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ा है।

शिकायतकर्ता के अधिवक्ता शीर्षेंदु दास के अनुसार, सुश्री मोइत्रा को बार-बार नोटिस भेजे गये थे, लेकिन उन्होंने व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने के निर्देश का पालन नहीं किया।

यह मामला इसी वर्ष 12 जून को की गयी सांसद की एक सोशल मीडिया पोस्ट से संबंधित है, जो महिला सैनिकों को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से जुड़ी टिप्पणियों पर कृष्णनगर में हुए विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में की गयी थी।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि सुश्री मोइत्रा के बयान में महिलाओं की स्वतंत्रता, हिंदुओं द्वारा पवित्र मानी जाने वाली 'तुलसी' और मुस्लिम महिलाओं के पहने जाने वाले हिजाब या बुरके को लेकर आपत्तिजनक बातें कही गयी थीं। शिकायत में कहा गया कि इन टिप्पणियों से सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता है और हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदायों की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं।

अधिवक्ता ने बताया कि इस मामले में 27 जून को शिकायत दर्ज करायी गयी थी, जिसके बाद सुश्री मोइत्रा को कई बार नोटिस जारी किये गये।

अदालत ने इससे पहले 18 अगस्त को उनकी व्यक्तिगत पेशी की अंतिम तिथि तय की थी। जब वह उपस्थित नहीं हुईं, तो अदालत ने उन्हें 19 अगस्त को पेश होने का एक और मौका दिया और बुधवार शाम पांच बजे तक का समय दिया। अधिवक्ता ने दलील दी कि बढ़ायी गयी समयसीमा के बावजूद वह उपस्थित होने में विफल रहीं। अधिवक्ता दास ने तर्क दिया कि कानून सभी के लिए समान है, चाहे वह आम नागरिक हो या सांसद। उन्होंने कहा कि सुश्री मोइत्रा को अदालत के निर्देशों का पालन करने के बार-बार अवसर दिये गये थे।

शिकायतकर्ता पक्ष ने नयी दिल्ली और कोलकाता में सुश्री मोइत्रा के अलग-अलग पतों का पता लगाने में आ रही कठिनाइयों का हवाला देते हुए वारंट की तामील के लिए पुलिस सहायता मांगने के लिए न्यायालय का रुख भी किया। नदिया के पुलिस अधीक्षक के माध्यम से इस आदेश का पालन कराने के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट तृतीय न्यायालय के समक्ष आवेदन जमा किया गया।

यह घटनाक्रम जिला अदालत के समक्ष कोलकाता से आये सुश्री मोइत्रा के अधिवक्ता की मौजूदगी के बावजूद हुआ। उन्होंने जोर देकर कहा कि न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष मुख्य मुद्दा बार-बार दिये गये निर्देशों के बावजूद उनका व्यक्तिगत उपस्थित न होना था।

न्यायालय ने अब निर्देश दिया है कि वारंट के निष्पादन में सुश्री मोइत्रा को 28 अगस्त तक उनके समक्ष पेश किया जाये।

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