सिलीगुड़ी , जुलाई 05 -- पश्चिम बंगाल में गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के प्रमुख बिमल गुरुंग ने रविवार को पहाड़ी क्षेत्र, तराई और डुआर्स के लिए एक स्थायी राजनीतिक समाधान की अपनी पुरानी मांग को दोहराया। उन्होंने कहा कि यह समझौता 'संविधान के दायरे के भीतर' होना चाहिए।
पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत और मदारीहाट विधानसभा क्षेत्र से गोरखा जनमुक्ति मोर्चा समर्थित उम्मीदवार लक्ष्मण लिंबू के निर्वाचित होने के बाद बीरपारा-मदारीहाट में आयोजित एक विजय उत्सव को संबोधित करते हुए श्री गुरुंग ने कहा कि एक संवैधानिक और स्थायी राजनीतिक समाधान की मांग केंद्र के समक्ष लगातार उठायी गयी है।
श्री गुरुंग ने कहा, " हमने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ इस मुद्दे पर बार-बार चर्चा की है। गृह मंत्री ने चुनाव से पहले हमें यह आश्वासन भी दिया था कि संविधान के दायरे में एक स्थायी राजनीतिक समाधान निकाला जाएगा।"गोरखालैंड के मुद्दे पर प्रकाश डालते हुए श्री गुरुंग ने कहा कि गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने केंद्र द्वारा नियुक्त मध्यस्थ के समक्ष अपनी मांगें पहले ही रख दी हैं।
उन्होंने कहा, " मध्यस्थ के सामने हमने अपनी मांग स्पष्ट रूप से रखी थीया तो गोरखालैंड या केंद्र शासित प्रदेश। वह मांग अभी चर्चा के अधीन है। वर्तमान में हमारी तत्काल प्राथमिकता इस क्षेत्र की बहुसंख्यक गोरखा आबादी को ध्यान में रखते हुए, 296 मौजा सहित पहाड़ी और तराई-डुआर्स क्षेत्रों के लिए संवैधानिक ढांचे के भीतर एक स्थायी राजनीतिक समाधान निकालना है। "उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने दार्जिलिंग हिल्स में हितधारकों के साथ बातचीत करने और लोगों की आकांक्षाओं की जांच करने के लिए सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी पंकज कुमार सिंह को मध्यस्थ नियुक्त किया था, जिसमें एक स्थायी राजनीतिक समाधान की उनकी मांग और उनकी पहचान से जुड़ी चिंताओं का समाधान शामिल है।
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