कोलकाता , फरवरी 20 -- राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल पुलिस अदालत के निर्देशों के बावजूद बेलडांगा हिंसा से संबंधित केस डायरी सौंपने में आनाकानी कर रही है। इस कारण केंद्रीय एजेंसी जांच शुरू नहीं कर पा रही है।
लगातार असहयोग का हवाला देकर एनआईए ने कलकत्ता उच्च न्यायालय से दखल की मांग की है। इसकी सुनवाई मंगलवार को होने की संभावना है। एजेंसी ने पहले भी कोलकाता के सत्र न्यायालय में सुनवाई के दौरान यही शिकायत की थी, जहां बेलडांगा हिंसा के जांच अधिकारी से पूछा गया था कि केस डायरी हस्तांतरित क्यों नहीं की गयी?एनआईए के वकील ने अदालत को बताया कि हालांकि जांच न्यायिक आदेशों के तहत की जा रही है, लेकिन केस डायरी की अनुपस्थिति के कारण प्रक्रिया रुक गयी है। इसके बाद अदालत ने निर्देश दिया कि 26 फरवरी तक केस डायरी सौंप दी जाए।"इसके बाद एनआईए ने इस मुद्दे की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया। बेलडांगा हिंसा को लेकर कलकत्ता उच्च न्यायालय में कई जनहित याचिकाएं दायर की गयी हैं, जिनमें पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी की दायर एक याचिका भी शामिल है।
मुख्य न्यायाधीश सुजय पाल और न्यायमूर्ति पार्थसारथी सेन की खंडपीठ ने पहले यह टिप्पणी की थी कि यदि केंद्र चाहे तो जांच एनआईए को सौंपी जा सकती है। पीठ ने यह भी कहा था कि यदि आवश्यकता हो तो राज्य अतिरिक्त केंद्रीय बलों की मांग कर सकता है। राज्य सरकार ने इस आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट कर दिया था कि वह एनआईए की जांच में हस्तक्षेप नहीं करेगी और एजेंसी को जांच जारी रखने की अनुमति दे दी। एनआईए जांच पर रोक लगाने से इनकार करते हुए उच्चतम न्यायालय ने एजेंसी को उच्च न्यायालय में अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 15 को लागू करने पर निर्णय उच्च न्यायालय को लेना चाहिए और एनआईए को अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में वहां पेश करने का निर्देश दिया।
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