कोलकाता , जुलाई 14 -- पश्चिम बंगाल सरकार ने भारत-बंगलादेश सीमा पर बाड़ लगाने और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को 1,024.75 एकड़ जमीन सौंप दी है।
नौ सीमावर्ती जिलों में 172.6 किलोमीटर लंबे क्षेत्र को कवर करने वाले इस भूमि हस्तांतरण से निगरानी बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय सीमा के संवेदनशील हिस्सों को सुरक्षित करने के उद्देश्य से लंबे समय से लंबित कई सुरक्षा परियोजनाओं में तेजी आने की उम्मीद है।
यह कदम सीमा अवसंरचना परियोजनाओं को समय पर पूरा करने की सुविधा प्रदान कर राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने की सरकार की घोषित प्रतिबद्धता के हिस्से के रूप में उठाया गया है।
अधिकारियों ने कहा कि इस जमीन का प्राथमिक उपयोग सीमा सुरक्षा के दृष्टिकोण से संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में नयी सीमा चौकियों (बीओपी) के निर्माण, कंटीले तारों की बाड़ के विस्तार और अन्य रणनीतिक बुनियादी ढांचे के विकास के लिए किया जायेगा।
मजबूत बुनियादी ढांचे से बीएसएफ और जिला प्रशासनों के बीच समन्वय में सुधार की उम्मीद है, साथ ही अवैध घुसपैठ, सीमा पार तस्करी और अन्य सीमा पार अपराधों को रोकने के लिए चौबीसों घंटे निगरानी संभव हो सकेगी।
पश्चिम बंगाल बंगलादेश के साथ लगभग 2,216 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करता है, जो किसी भी भारतीय राज्य की साझा की जाने वाली सबसे लंबी सीमा है।
यह सीमा नदी क्षेत्रों, कृषि योग्य भूमि और घनी आबादी वाले इलाकों से होकर गुजरती है, जिससे सीमा प्रबंधन विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण हो जाता है और मजबूत बाड़ व सुरक्षा ढांचे के महत्व को बताता है।
अधिकारियों के अनुसार, भूमि का सबसे बड़ा हिस्सा मुर्शिदाबाद जिले में सौंपा गया है, जहां सीमा के 45.4 किलोमीटर क्षेत्र को कवर करने वाली 337 एकड़ जमीन बीएसएफ को हस्तांतरित की गयी है। इसके बाद उत्तर 24 परगना में 42.07 किलोमीटर क्षेत्र की 241.03 एकड़ जमीन और कूचबिहार में 39.39 किलोमीटर क्षेत्र को कवर करने वाली 135.33 एकड़ जमीन हस्तांतरित की गयी।
मालदा में 20.15 किलोमीटर लंबी सीमा रेखा के लिए 176.78 एकड़ जमीन सौंपी गयी है। नदिया जिले ने 14.79 किलोमीटर क्षेत्र की 95.11 एकड़ जमीन दी है, जबकि दक्षिण दिनाजपुर ने 7.75 किलोमीटर क्षेत्र की 26.41 एकड़ जमीन हस्तांतरित की है।
दार्जिलिंग, उत्तर दिनाजपुर और जलपाईगुड़ी में भी जमीन के छोटे टुकड़े हस्तांतरित किये गये हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय सीमा के 172.6 किलोमीटर क्षेत्र को कवर करने वाली कुल हस्तांतरित जमीन 1,024.75 एकड़ हो गयी है।
अधिकारियों ने कहा कि कई वर्षों से भूमि अधिग्रहण के विवादों के कारण विभिन्न जिलों में बाड़ लगाने और सीमा अवसंरचना की परियोजनाओं में देरी हो रही थी।
इन परियोजनाओं के रणनीतिक महत्व को पहचानते हुए राज्य प्रशासन ने हाल ही में जिला अधिकारियों को सीमा विकास के लिए आवश्यक भूमि की पहचान और उसके हस्तांतरण में तेजी लाने का निर्देश दिया था।
नबन्ना ने सीमा अवसंरचना परियोजनाओं से संबंधित लंबित भूमि विवादों को जल्द से जल्द सुलझाने के लिए सभी जिला प्रशासनों को स्पष्ट निर्देश जारी किये थे।
इसी पहल के तहत पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने पिछले सप्ताह नबन्ना सभागार में एक कार्यक्रम के दौरान औपचारिक रूप से भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू की, जिससे लंबे समय से रुके कार्यों के निष्पादन के लिए बीएसएफ को जमीन देने का रास्ता साफ हो गया।
इस हस्तांतरण से नयी सीमा चौकियों के निर्माण में तेजी आने, कंटीले तारों की बाड़ के विस्तार में आसानी होने और भारत-बांगलादेश सीमा के संवेदनशील हिस्सों में निगरानी क्षमताओं में सुधार होने की उम्मीद है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित