ढाका , जुलाई 20 -- बंगलादेश जुलाई 2024 के विद्रोह के बाद बलपूर्वक गायब करने के पहले रिपोर्ट किये गये मामले का सामना कर रहा है। इससे यह आशंका फिर से बढ़ गयी है कि क्या सुरक्षा बल उन तौर-तरीकों पर लौट रहे हैं, जिनका इस्तेमाल पिछली सरकार के दौरान बड़े पैमाने पर किया गया था।
इस तरह के मामले में 30 वर्षीय मछुआरे मिराज शेख के लापता होने से बंगलादेश में बलपूर्वक गायब करने की घटनाओं की वापसी को लेकर नयी चिंताएं पैदा हो गयी हैं। सोमवार को ह्यूमन राइट्स वॉच के जारी बयान के अनुसार, उसने बंगलादेश सरकार से बलपूर्वक गायब करने की घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा बलों की जवाबदेही सुनिश्चित करने को कहा है।
ह्यूमन राइट्स वॉच ने बंगलादेशी अधिकारियों से 30 वर्षीय मछुआरे मिराज शेख की गुमशुदगी की जांच करने के लिए उच्च न्यायालय के आदेश का तुरंत पालन करने का आह्वान किया है। रिपोर्टों के मुताबिक, शेख को आखिरी बार अप्रैल 2026 में तटरक्षक बल कर्मियों की हिरासत में देखा गया था।
पिछली सरकार के कार्यकाल में लोगों को बलपूर्वक गायब करना एक गंभीर समस्या बन गयी थी, जिसे 2024 के विरोध प्रदर्शनों में सत्ता से उखाड़ फेंका गया था। इसी वजह से अगस्त 2024 से फरवरी 2026 के चुनावी दौर के बीच शासन करने वाली अंतरिम सरकार को नवंबर 2025 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग अध्यादेश लागू करना पड़ा था।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब लोग नयी सरकार की आलोचना कर रहे हैं, क्योंकि उसने शेख हसीना सरकार के पतन के बाद उनके लागू किये गये प्रमुख मानवाधिकार सुधारों को निष्प्रभावी होने दिया। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार के इस कदम ने सुरक्षा एजेंसियों के दुर्व्यवहार को रोकने वाले सुरक्षा उपायों को कमजोर कर दिया है।
ह्यूमन राइट्स वॉच की एशिया उप-निदेशक मीनाक्षी गांगुली ने कहा, "शेख हसीना के 15 वर्ष के शासनकाल के दौरान हजारों लोगों को बलपूर्वक गायब किया गया और यह हालिया मामला दिखाता है कि अगर वास्तविक सुधार नहीं किये गये तो इस तरह की घटनाएं दोबारा हो सकती हैं।"उन्होंने कहा, "यह स्पष्ट है कि बंगलादेशी सुरक्षा एजेंसियों ने इन तौर-तरीकों को गहराई से अपना लिया है। इसलिए सुधार का वादा करने वाली नयी सरकार को हर हाल में सुरक्षा उपाय, संस्थागत बदलाव और जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए।""मानवाधिकार जांचकर्ताओं ने चश्मदीदों की ओर से दी गई जानकारी के आधार पर बताया कि मिराज शेख को 10 अप्रैल की रात को मोंगला के सुंदरवन वन क्षेत्र के पास जॉयमोनिर घोल में हिरासत में लिया गया था। चश्मदीदों ने कोस्ट गार्ड कर्मियों को मछुआरे शेख को रोकते और उन्हें स्पीडबोट से ले जाते देखा था।
ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट के अनुसार, अगले दिन शेख के परिजन उनके ठिकाने की जानकारी लेने मोंगला के डिगराज स्थित कोस्ट गार्ड कार्यालय गये। अधिकारियों ने शुरुआत में उनसे कहा कि वह 'एक ऑपरेशन पर' हैं और उन्हें बाद में आने को कहा। जब परिवार वापस लौटा, तो उन्हें बताया गया कि शेख को कभी वहां हिरासत में लिया ही नहीं गया था।
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