ढाका , मई 25 -- बंगलादेश सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ अपने मौजूदा कर्ज समझौते से औपचारिक रूप से पीछे हटने का फैसला किया है।

यह समझौता पूर्ववर्ती अवामी लीग सरकार के कार्यकाल के दौरान हुआ था। अब सरकार ने संशोधित शर्तों के तहत नये सिरे से पांच अरब डॉलर (लगभग 42,000 करोड़ रुपये) के वित्तीय पैकेज के लिए बातचीत शुरू करने का निर्णय लिया है। यह कदम देश की आर्थिक नीति के दृष्टिकोण में बड़ा बदलाव दिखाता है।

इस फैसले की पुष्टि 21 मई को हुई एक उच्च स्तरीय वर्चुअल बैठक के बाद की गयी। यह बैठक बंगलादेश के वित्त एवं योजना मंत्री अमीर खुसरू महमूद चौधरी के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल और आईएमएफ के उप प्रबंध निदेशक निगेल क्लार्क के नेतृत्व वाली टीम के बीच हुई थी।

बंगलादेश के वित्त मंत्रालय के 25 मई को जारी बयान के अनुसार यह बातचीत वृहद आर्थिक स्थिरता, आईएमएफ कार्यक्रमों की स्थिति और ढाका व इस कर्जदाता संस्था के बीच सहयोग के भविष्य के ढांचे पर केन्द्रित थी।

बातचीत के दौरान वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि मौजूदा आईएमएफ कार्यक्रम को बिल्कुल अलग राजनीतिक और आर्थिक माहौल में तैयार किया गया था। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम अब उन मौजूदा सामाजिक-आर्थिक वास्तविकताओं को नहीं दर्शाता है, जिनका सामना नयी चुनी हुई सरकार कर रही है।

उन्होंने तर्क दिया कि बदलते घरेलू हालात, राजनीतिक अर्थव्यवस्था के दबावों और वैश्विक अनिश्चितताओं ने इस कार्यक्रम के कई संरचनात्मक सुधारों को लागू करने में बड़ी बाधाएं खड़ी की हैं।

व्यापक आर्थिक सुधार और आर्थिक स्थिरता के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोबारा दोहराते हुए मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि बंगला देश एक अधिक 'व्यावहारिक' और 'क्रमबद्ध' सुधार रोडमैप चाहता है, जो देश की मौजूदा परिस्थितियों के अनुकूल हो।

इन बिंदुओं के मद्देनजर इस वर्चुअल बैठक का मुख्य ध्यान नयी चुनी सरकार के तहत एक बिल्कुल नयी आईएमएफ ऋण व्यवस्था शुरू करने पर रहा। इस वैकल्पिक ढांचे में एक व्यावहारिक तीन साल की समय-सीमा का प्रस्ताव है। इसमें व्यावहारिक और क्रमबद्ध तरीके से हासिल किये जा सकने वाले प्राथमिकता वाले सुधारों को शामिल किया गया है।

आईएमएफ के उप प्रबंध निदेशक निगेल क्लार्क ने बंगलादेश की इस नयी सुधार पहल और नयी ऋण सुविधा के प्रस्ताव का स्वागत किया। उन्होंने इस कर्जदाता संस्था और देश के बीच लगातार करीबी और सकारात्मक जुड़ाव बने रहने की उम्मीद जतायी।

रिपोर्टों के मुताबिक, मौजूदा समझौते को छोड़ने का यह फैसला आईएमएफ की कड़े रुख वाली शर्तों पर महीनों से जारी गतिरोध के बाद लिया गया है।

मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, आईएमएफ बंगलादेश पर लगातार दबाव बना रहा था कि वह 15 प्रतिशत की एक समान वैट दर लागू करे। इसके अलावा वह टैक्स छूट खत्म करने और बिजली व खाद पर दी जाने वाली व्यापक अनुदान की जगह सीधे बैंक खाते में नकद हस्तांतरण कार्यक्रम शुरू करने की मांग कर रहा था।

अंतरराष्ट्रीय विकास भागीदारों ने बैंक रिजॉल्यूशन एक्ट 2026 के तहत किये गये संशोधनों पर भी चिंता जतायी है। कुछ दानदाताओं का मानना है कि इन संशोधनों से पारदर्शिता की सुरक्षा मजबूत होने के बजाय कमजोर हुई है।

वित्त मंत्री चौधरी के अनुसार, बीएनपी सरकार दानदाताओं की ऐसी शर्तों को कतई स्वीकार नहीं कर सकती, क्योंकि ये जनहित और पार्टी के घोषणापत्र के बिल्कुल खिलाफ हैं।

इन तनावों के बावजूद ढाका के अधिकारियों का मानना है कि आईएमएफ के सक्रिय कार्यक्रम को बनाये रखना रणनीतिक रूप से बेहद जरूरी है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि यह संस्थागत मंजूरी की तरह काम करता है। इससे विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) जैसे अन्य कर्जदाता संस्थानों से हर साल लगभग 25,000 करोड़ से 33,500 करोड़ रुपये (तीन अरब से चार अरब डॉलर) तक की समानांतर वित्तीय सहायता मिलने का रास्ता साफ हो जायेगा।

इस प्रस्तावित नये कार्यक्रम के आकार, ढांचे और शर्तों पर बातचीत करने के लिए आईएमएफ का एक मिशन जुलाई या अगस्त में ढाका का दौरा कर सकता है।

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