नयी दिल्ली/ढाका , अगस्त 01 -- बंगलादेश को 'पैक्स सिलिका' आर्थिक सुरक्षा ढांचे में जगह की पेशकश की गयी है। इस पहल का उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमता (एआई), सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों से जुड़ी वैश्विक आपूर्ति शृंखला (सप्लाई चेन) को चीन से दूर पुनर्गठित करना है।

दक्षिण एवं मध्य एशिया के लिए अमेरिकी विशेष दूत सर्जियो गोर ने शनिवार को प्रधानमंत्री तारिक रहमान के साथ बैठक में प्रस्ताव दिया कि बंगलादेश अमेरिका के नेतृत्व वाली 'पैक्स सिलिका' पहल में शामिल हो।

महत्वपूर्ण बात यह है कि श्री गोर ने एक दिन पहले ढाका में भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी से मुलाकात की थी। भारत चूंकि पहले से ही पैक्स सिलिका का पूर्ण सदस्य है, जो चीन से हटकर एक रणनीतिक आर्थिक आपूर्ति शृंखला स्थापित करने का समझौता है।

ढाका के शीर्ष सूत्रों ने कहा, "इसकी पूरी संभावना है कि ढाका को यह पेशकश करने से पहले भारतीयों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की गयी हो।" इसका उद्देश्य बंगलादेश को चीन के प्रभाव से दूर करना है, जिसे लेकर भारत-अमेरिका दोनों चिंतित हैं।

विदेश मंत्रालय में पूर्व सचिव (आर्थिक संबंध) पिनाक आर. चक्रवर्ती ने /यूनीवार्ता/ को बताया, "यह एक अच्छा प्रस्ताव है। यदि ढाका पैक्स सिलिका में शामिल होता है तो यह बंगलादेश को एक महत्वपूर्ण आर्थिक एवं रणनीतिक पारिस्थितिकी तंत्र और नेटवर्क में ले आयेगा, जो उसके हित में होगा।"यह सर्वविदित है कि पैक्स सिलिका कोई साधारण पारंपरिक मुक्त-व्यापार समझौता (एफटीए) नहीं है, बल्कि यह एक आर्थिक-सुरक्षा ढांचा है, जिसमें भागीदार देश अमेरिका, भारत, जापान, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया महत्वपूर्ण खनिजों और एआई की दुनिया में व्यापार और निवेश के लिए एक नयी आपूर्ति शृंखला बना रहे हैं, जिसमें चीन की कोई भूमिका नहीं होगी।

यद्यपि भारत-अमेरिका के लिए बंगलादेश का पैक्स सिलिका में शामिल होना उसे चीन के प्रभाव से दूर करना हो सकता है, लेकिन बंगलादेश के लिए इसका आकर्षण भू-राजनीति से अधिक आर्थिक अस्तित्व की व्यावहारिक राजनीति से जुड़ा है। पैक्स सिलिका और अमेरिका के साथ संबंधों का अर्थ अमेरिकी और भारतीय बाजारों तक आसान पहुंच जारी रहना और पश्चिमी-नियंत्रित बहुपक्षीय संस्थानों से पूंजी व तकनीक प्राप्त होना हो सकता है।

अमेरिकियों ने वस्त्र पर तरजीही टैरिफ और शुल्क-मुक्त रियायतों को रक्षा और अन्य गैर-व्यापारिक मुद्दों से जुड़े समझौतों से सूक्ष्म रूप से जोड़ दिया है, जिससे अमेरिका को चीन से दूर कर बंगलादेश को रणनीतिक रूप से अपने पक्ष में लाने का सीधा जरिया मिल गया है।

कई विश्लेषक पैक्स सिलिका में शामिल होने को चीन के नेतृत्व वाली आर्थिक व्यवस्था के खिलाफ वोट के रूप में देखते हैं। बंगलादेश के मामले में इसके परिणामस्वरूप डेटा सेंटर, उन्नत विनिर्माण और डिजिटल सेवाओं जैसे नये क्षेत्रों में निवेश भी आ सकता है।

विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा, "शुरुआत के तौर पर असम में बन रहा भारत का सेमीकंडक्टर कॉम्प्लेक्स और दक्षिणी बंगलादेश में जापान का माताबाड़ी बंदरगाह इस शृंखला के प्रमुख केंद्र (नोड्स) बन सकते हैं, जिसके नतीजतन बंगलादेश में कई उच्च-मूल्य वाले डाउनस्ट्रीम और अपस्ट्रीम उद्योग स्थापित हो सकते हैं।"श्री रहमान इस प्रस्ताव से कैसे निपटते हैं, यह आने वाले वर्षों में बंगलादेश के भाग्य और राजनीति को तय करेगा। 'ड्रैगन और ईगल' के बीच इस संतुलन में, श्री रहमान के अपने गुट में शामिल चीन-समर्थक मंत्रियों व सहयोगियों और चीन से करीबी संबंध रखने वाले राजनीतिक दलों के तकनीकी प्रगति या निवेश के वादों से बहुत अधिक उत्साहित होने की संभावना नहीं है।

कुछ लोग यह तर्क भी दे सकते हैं कि बंगलादेश के आर्थिक हित अमेरिका और चीन दोनों के साथ संबंधों की मांग करते हैं और चीन इस नदी-बहुल देश के लिए एक ऐसा संतुलन है, जिसका उपयोग वह भारत-अमेरिका दोनों से रियायतें प्राप्त करने के लिए कर सकता है।

बंगलादेश के लिए चीन एक प्रमुख ऋणदाता, परियोजना ठेकेदार और व्यापारिक साझेदार बना हुआ है, जबकि अमेरिका-भारत उसके लिए महत्वपूर्ण निर्यात बाजार तथा प्रौद्योगिकी व निवेश के संभावित स्रोत हैं। ऐसे नाजुक मोड़ पर जब देश की अर्थव्यवस्था और राजनीतिक उथल-पुथल ढाका की सड़कों पर हावी है, अमेरिकी नेतृत्व या श्री गोर को नाराज़ करने का जोखिम बंगलादेशी नेतृत्व शायद ही उठाना चाहेगा।

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