पेरिस , अक्टूबर 20 -- बढ़ती महंगाई और ईंधन की कीमतों के खिलाफ हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद फ्रांसीसी प्रशासन कुछ और इलाकों में कर्फ्यू लगा सकता है।
प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने मंगलवार को चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर मंगलवार शाम को और पाबंदियां लगाई जा सकती हैं। स्थानीय मेयरों के साथ तालमेल बिठाकर क्षेत्रीय प्रशासक यह फैसला लेंगे।
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं, क्योंकि अगले हफ्ते फिर से प्रदर्शनों का आह्वान किया गया है और मजदूर संघ नवंबर में सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं। इसके अलावा, अगले वर्ष होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले जनता का गुस्सा कई गुना बढ़ गया है और जनमत सर्वेक्षणों में दक्षिणपंथी नेत्री मरीन ले पेन आगे चल रही हैं। 'येलो वेस्ट' समूह ने भी शनिवार को एक बार फिर बड़े पैमाने पर लोगों से जुटने की अपील की है।
पेरिस और ल्योन के कुछ हिस्सों में रात का आंशिक कर्फ्यू लागू है तथा इसे अन्य क्षेत्रों तक बढ़ा दिया गया है। न्याय मंत्री जेराल्ड डारमिन ने बताया कि सप्ताहांत के उपद्रव के बाद 2,513 लोगों को हिरासत में लिया गया, 67 को जेल भेजा गया और दर्जनों न्यायिक जांच शुरू की गई हैं। उन्होंने हालांकि आपातकाल लगाने की मांग को खारिज करते हुए कहा कि प्रशासन सख्त पुलिस कार्रवाई से व्यवस्था बहाल कर सकता है।
कारोबारी दिग्गजों ने बड़े पैमाने पर हुए नुकसान को रोकने में नाकाम रहने के लिए प्रशासन की आलोचना की है। 'मेडेफ' के अध्यक्ष पैट्रिक मार्टिन ने बताया कि कम से कम 3,000 कारोबार प्रभावित हुए हैं। अर्थव्यवस्था मंत्री रोलैंड लेस्कुर ने कहा कि व्यापारियों को तेजी से कामकाज बहाल करने में मदद के लिए राहत उपायों का ऐलान किया जाएगा।
इस उपद्रव ने राजनीतिक दूरियों को और बढ़ा दिया है। श्री मैक्रों ने हिंसा की निंदा की, लेकिन खाड़ी देशों की यात्रा पर रवाना होने से पहले कोई ठोस प्रस्ताव पेश नहीं किए। श्री लेकोर्नू और वामपंथी नेता ज्यां-ल्यूक मेलेनचोन के बीच भी तीखी बयानबाजी हुई।
यह विरोध प्रदर्शन आर्थिक मंदी, बढ़ती महंगाई और जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने में सरकार की विफलता के कारण हो रहे हैं। फ्रांस अपने बढ़ते सार्वजनिक कर्ज को नियंत्रित करने के लिए भी संघर्ष कर रहा है। दूसरी तिमाही में सरकारी कर्ज जीडीपी का 119 फीसदी तक पहुंच गया, जबकि फ्रांस का 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड सोमवार को बढ़कर 4.9 फीसदी हो गया। इस संकट ने श्री मैक्रों के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है, क्योंकि जनता में असंतोष बढ़ने के कारण उनकी लोकप्रियता तेजी से घटी है।
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