तिरुवनंतपुरम , अक्टूबर 27 -- फ्रांस और भारत के नवाचार वर्ष 2026 के तहत फ्रांसीसी संगीत प्रस्तुति 'ले वॉयाज दे रेजे' मंगलवार को तिरुवनंतपुरम में अपने नौ शहरों के भारतीय दौरे का समापन करेगी।
इस प्रस्तुति में लाइव संगीत के साथ-साथ मंच पर वास्तविक समय में चित्र बनाने की कला का अनूठा मेल देखने को मिलेगा।
भारतीय फ्रांसीसी संस्थान ने एलायंस फ्रांसेज नेटवर्क के सहयोग से इस कार्यक्रम का आयोजन किया है। यह प्रस्तुति फ्रेंच लाइव प्रदर्शन कला श्रृंखला के तहत वायलोपिल्ली संस्कृति भवन में आयोजित की जाएगी।
इस कार्यक्रम में 'कॉन्सर्ट देसिने' नामक एक अनूठी शैली का इस्तेमाल किया गया है। इसमें संगीतकारों के साथ एक चित्रकार मंच पर ही चित्र बनाता है और उन चित्रों को उसी समय स्क्रीन पर दिखाया जाता है। 70 मिनट के इस कार्यक्रम में संगीत, दृश्य कला और कहानी कहने की शैली को एक साथ प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे दर्शकों को एक अनूठा सांस्कृतिक अनुभव मिलेगा।
इस प्रस्तुति में रेजे गायन और गिटार की जिम्मेदारी संभालेंगे, सोइफ्रान ताल वाद्य बजाएंगे, एम्दे मंच पर चित्र बनाएंगे और क्रिस्टू वास्तविक समय में चित्रों को स्क्रीन पर प्रदर्शित करेंगे। फ्रेंच और अंग्रेजी भाषाओं में होने वाले इस कार्यक्रम को 10 वर्ष और उससे अधिक आयु के दर्शकों के लिए उपयुक्त बताया गया है।
इस प्रस्तुति की प्रेरणा फ्रांस के ग्रेनोबल में रहने वाले गायक और गिटारवादक रेजे की संगीत यात्रा से मिली है। उन्होंने 20 वर्ष की उम्र में वाहनों से मुफ्त यात्रा करते हुए पश्चिम अफ्रीका का भ्रमण किया था। इस दौरान उन्होंने गाम्बिया, सेनेगल, माली, बुर्किना फासो और बेनिन में संगीत प्रस्तुतियां दीं।
इसके बाद उन्होंने फ्रांस में जैज गिटार का प्रशिक्षण लिया और ब्राजील के साल्वाडोर दा बाहिया में एक वर्ष बिताकर वहां के संगीत का अध्ययन किया।
ग्रेनोबल स्थित 'ले प्रोडक्शंस दु बाजार' द्वारा तैयार इस प्रस्तुति में जानी-पहचानी, भुला दी गयी और नयी कल्पनाओं से रची गयी धुनों का मिश्रण है। संगीत के साथ-साथ चित्रों में भी बदलाव होता रहता है, जिससे रंगों और काव्यात्मक भावों से भरपूर कहानी सामने आती है।इस प्रस्तुति का भारत से भी संबंध है। फरवरी 2023 में भारत यात्रा के दौरान चित्रकार एम्दे ने अपनी यात्रा की एक नोटबुक में देश के विभिन्न स्थानों के रेखाचित्र बनाए थे। इन चित्रों से उन्हें मौजूदा भारतीय दौरे के लिए रचनात्मक प्रेरणा मिली।
इस भारतीय दौरे की शुरुआत छह अक्टूबर को नयी दिल्ली से हुई थी। इसके बाद कार्यक्रम चंडीगढ़, कोलकाता, जयपुर, हैदराबाद, भोपाल और पुडुचेरी पहुंचा। अब मंगलवार को तिरुवनंतपुरम में अंतिम प्रस्तुति के साथ इसका समापन होगा।
भारत में फ्रांसीसी संस्थान के निदेशक ग्रेगोर ट्रूमेल ने कहा कि यह प्रस्तुति फ्रांस-भारत नवाचार वर्ष के माध्यम से प्रोत्साहित सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सहयोगात्मक रचनात्मकता की भावना को दर्शाती है।
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