अमृतसर , जून 15 -- पंजाब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता एवं सिख चिंतक प्रो. सरचांद सिंह ख्याला ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए कहा है कि हाल ही में सामने आये फोरेंसिक खुलासों के बाद उनके पास मुख्यमंत्री और विधायक पद पर बने रहने का कोई नैतिक, सामाजिक या राजनीतिक अधिकार नहीं रह जाता।
प्रो. ख्याला ने सोमवार को कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज द्वारा सरकारी मान्यता प्राप्त उच्च तकनीकी फोरेंसिक प्रयोगशालाओं की रिपोर्टों का हवाला देते हुए यह दावा किया गया है कि 10 गुरु साहिबानों की तस्वीर से जुड़े विवादित वीडियो में किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं हुई। उनके अनुसार, यदि यह तथ्य सही हैं तो मामला केवल एक व्यक्ति के आचरण तक सीमित नहीं है, बल्कि करोड़ों सिखों और गुरु नानक नामलेवा संगतों की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि यदि कोई सामान्य नागरिक ऐसे आरोपों के लिए कानून के दायरे में आ सकता है, तो राज्य का मुख्यमंत्री भी कानून और नैतिकता से ऊपर नहीं हो सकता। उन्होंने मांग की कि उपलब्ध साक्ष्यों और फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को आहत करने संबंधी उपयुक्त कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जाये।
प्रो. ख्याला ने कहा कि जब मुख्यमंत्री को अकाल तख्त साहिब में तलब किया गया था, तब उन्होंने संबंधित वीडियो को फर्जी बताते हुए किसी भी फोरेंसिक जांच का सामना करने की चुनौती दी थी। अब यदि फोरेंसिक रिपोर्टों के आधार पर वीडियो की प्रामाणिकता स्थापित हो चुकी है, तो यह मामला धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के साथ-साथ जनता और धार्मिक संस्थाओं को गुमराह करने से भी जुड़ जाता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री एक सिख परिवार से संबंध रखते हैं और उनसे सिख परंपराओं तथा मर्यादा के प्रति अधिक संवेदनशीलता की अपेक्षा की जाती है। यदि सामने आये आरोप सही साबित होते हैं तो यह पूरे सिख समुदाय को आहत करने वाला विषय है।
भाजपा नेता ने पंजाब पुलिस और प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि मामले की जांच किसी भी राजनीतिक प्रभाव से मुक्त होकर की जानी चाहिए। उन्होंने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से भी अपील की कि यदि पुलिस कार्रवाई नहीं करती तो सिख भावनाओं और पंथक मर्यादा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कानूनी कदम उठाये जायें।
प्रो ख्याला ने आम आदमी पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल से भी इस मुद्दे पर पार्टी का रुख स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि आम आदमी पार्टी नैतिक राजनीति का दावा करती है तो उसे इस मामले पर अपना स्पष्ट पक्ष रखना चाहिए। यह केवल राजनीतिक विवाद नहीं, बल्कि पंजाब की धार्मिक संवेदनशीलता, सार्वजनिक जीवन की नैतिकता और जवाबदेही से जुड़ा मामला है। इसलिए जनता निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई और नैतिक जवाबदेही की अपेक्षा रखती है।
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