नयी दिल्ली , अक्टूबर 27 -- तृणमूल कांग्रेस की सांसद डोला सेन ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय में आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने ऑनलाइन फॉर्म-6 के प्रारूप में बदलाव की बात स्वीकार करने के बावजूद उसे उचित ठहराने की कोशिश की है।

सुश्री सेन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि आयोग ने अपने हलफनामे में स्वीकार किया है कि एसआईआर घोषणा-पत्र को ऑनलाइन फॉर्म-6 के साथ प्रदर्शित करने से यह धारणा बन सकती थी कि फॉर्म में ही बदलाव किया गया है। उन्होंने कहा, "फॉर्म-6 में कथित छेड़छाड़ को उचित ठहराने में संस्था का दुस्साहस देखिए।"सुश्री गुरुस्वामी ने कहा कि बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से संबंधित कार्यवाही को फॉर्म-6 में बदलाव की मंजूरी नहीं माना जा सकता। आयोग ने अपने हलफनामे में कहा है कि वैधानिक फॉर्म-6 में संशोधन का अधिकार केवल केंद्र सरकार को है और उसने ऐसा कोई संशोधन नहीं किया। घोषणा-पत्र को अलग दस्तावेज बताते हुए आयोग ने कहा कि इसे ऑनलाइन प्रक्रिया में एक ओटीपी और ई-साइन के जरिए आवेदन पूरा करने की सुविधा के लिए साथ दिखाया गया था।

आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने गुरुस्वामी की दलीलों पर आपत्ति जताई।

न्यायालय चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और एसआईआर के दौरान कथित अनियमितताओं, विशेष रूप से बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। याचिकाकर्ताओं में राहुल गांधी, दिग्विजय सिंह, असदुद्दीन ओवैसी और डोला सेन शामिल हैं।

पीठ ने याचिकाकर्ताओं को आयोग के 26 अक्टूबर के हलफनामे पर जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया। मामले पर अगली सुनवाई अस्थायी रूप से 17 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है।

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