लखनऊ , अक्टूबर 05 -- भारत भले ही मंगलवार को 'भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी एकाना क्रिकेट स्टेडियम' में फेवरेट के तौर पर उतरे, लेकिन वेस्टइंडीज के पास आखिरी वनडे में 300 से अधिक रनों के लक्ष्य का पीछा करके जीत हासिल करने की याद से उसका हौसला बुलंद है।
उस जीत से भले ही वे वनडे सीरीज न जीत पाए हों, लेकिन इसने कैरेबियाई टीम को भारत से टूटे हुए आत्मविश्वास के साथ लौटने से जरूर बचाया। साथ ही, पांच मैचों की टी-20 सीरीज शुरू होने से पहले यह उन्हें एक काम का मनोवैज्ञानिक हथियार भी देता है। वहीं, भारत के पास भी अपने कई हथियार मौजूद हैं।
श्रेयस अय्यर के कप्तान और तिलक वर्मा के उप-कप्तान बनने के साथ, चयनकर्ताओं ने अनुभव और युवा जोश का मेल बिठाया है, जिससे टीम मैनेजमेंट के सामने यह सुखद दुविधा है कि किसे बाहर रखा जाए। शीर्ष क्रम में अभिषेक शर्मा का खेलना लगभग तय है। असली सस्पेंस उसके बाद शुरू होता है। संजू सैमसन ओपनिंग कर सकते हैं, ईशान किशन मध्यमक्रम में बाएं हाथ के बल्लेबाज़ का विकल्प दे सकते हैं, जबकि युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी एक और मौके का इंतजार कर रहे हैं ताकि चयनकर्ता या तो प्रेरित महसूस करें या फिर उन्हें बेवजह अधिक सतर्क माना जाए। निचले क्रम में भी पावर-हिटिंग की कोई कमी नहीं है। शिवम दुबे, नीतीश कुमार रेड्डी और अक्षर पटेल रन बनाने और ओवर डालने में सक्षम हैं।
गेंदबाजी विभाग में भी अपनी एक पहेली है। जसप्रीत बुमराह को आराम दिए जाने के बाद, भारत को एक और मुख्य गेंदबाज ढूंढना होगा। अर्शदीप सिंह अनुभव देते हैं, कुलदीप यादव मिस्ट्री (रहस्य) लाते हैं, जबकि मयंक यादव और प्रिंस यादव ऐसी जबरदस्त रफ्तार देते हैं कि बल्लेबाज अपनी ज़िंदगी के फैसलों पर दोबारा सोचने को मजबूर हो जाएं।
वहीं वेस्टइंडीज की टीम की बात की जाये तो वह महज उम्मीदों के सहारे नहीं आई है। शाई होप, निकोलस पूरन, शिमरोन हेटमायर, रोवमैन पॉवेल और शेरफेन रदरफोर्ड मेहमान टीम को इतनी ताकत देते हैं कि वे एक सम्मानजनक लक्ष्य को भी मुश्किल लक्ष्य में बदल सकते हैं। एकदिवसीय सीरीज के आखिरी मैच ने उनके आत्मविश्वास को और बढ़ाया है, जबकि चोटिल ज्वेल एंड्रयू की जगह आमिर जांगू को शामिल करने से एक और ऐसा बल्लेबाज टीम में आया है जो शानदार वनडे सीरीज के बाद अच्छी फ़ॉर्म में है। भारत का रिकॉर्ड बेहतर है, घरेलू मैदान का फायदा है और टीम में ज़्यादा गहराई है। वेस्टइंडीज के पास टी-20 क्रिकेट में एक ख़तरनाक खूबी है। उनके पास इतनी तेजी से रन बनाने की क्षमता है कि 180 रन का स्कोर भी मामूली लगने लगता है।
लखनऊ की पिच खेल में एक नया मोड़ ला सकती है। आम तौर पर धीमी और स्पिन के लिए मददगार रहने वाली इस पिच पर अक्षर और कुलदीप अहम भूमिका निभा सकते हैं, हालांकि शाम की ओस के कारण बाद में बल्लेबाजी करना फायदेमंद हो सकता है। भारत ने एकाना में अपने तीनों टी-20 मैच जीते हैं, जबकि वेस्टइंडीज ने इस मैदान पर खेले गए चार मैचों में से केवल एक में जीत हासिल की है। इसलिए, कागज पर तो भारत का पलड़ा भारी नजर आता है। लेकिन अच्छी बात यह है कि क्रिकेट कभी कागज पर नहीं खेला जाता।
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