गरियाबंद , मार्च 22 -- छत्तीगढ के गरियाबंद जिले के आदिवासी अंचल में बसे ग्राम फूलझर में इन दिनों पेयजल संकट विकराल रूप ले चुका है। गर्मी की शुरुआत के साथ ही गांव में पानी की उपलब्धता लगभग खत्म हो गई है, जिससे ग्रामीणों का जीवन प्रभावित हो रहा है। हालात ऐसे हैं कि लोगों को अपनी दैनिक जरूरतों के लिए भी काफी संघर्ष करना पड़ रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार गांव में नल-जल योजना के तहत बनाई गई पानी टंकी लंबे समय से बंद पड़ी है। इसके कारण घर-घर तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है। करीब 400 की आबादी वाले इस गांव में लगाए गए सैकड़ों घरेलू नल निष्क्रिय हो चुके हैं, जिससे ग्रामीणों को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा।

स्थिति को गंभीरता इसी बात से पता चलती है कि गांव के अधिकांश हैंडपंप भी जवाब देने लगे हैं। पानी की जगह केवल हवा निकल रही है, जिससे लोगों के सामने पेयजल का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। मजबूरी में ग्रामीण रोज सुबह करीब दो किलोमीटर दूर स्थित जमाही गांव जाकर पानी लाने को विवश हैं।

आज (22 मार्च) को विश्व जल दिवस के रूप में जाना जाता है। आज के दिन जहां जल संरक्षण और उपलब्धता को लेकर जागरूकता की बातें की जाती हैं, वहीं फूलझर के ग्रामीणों को इस दिन भी कोई राहत नहीं मिल सकी। गांव के लोग आज भी बुनियादी जरूरत-पानी-के लिए संघर्ष करते नजर आए।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। भीषण गर्मी के बीच पानी की किल्लत ने जनजीवन संकट में पड़ जायेगा। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब संज्ञान लेकर ठोस कदम उठाता है।

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