देहरादून , सितम्बर 03 -- उत्तराखंड के चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल की अध्यक्षता में गुरुवार को सचिवालय में डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन की पांच सूत्रीय मांगों के संबंध में आयोजित बैठक में एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने अपनी मांगों को विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई न होने के कारण एसोसिएशन 17 सितंबर से चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेंगे। इस पर मंत्री ने अधिकारियों को समस्याओं के संदर्भ में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने एसोसिएशन की मांगों को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों के साथ बिंदुवार चर्चा की। संगठन की वर्ष 2009 के बाद नियुक्त फार्मासिस्टों को भी प्रथम एसीपी के रूप में प्रथम पदोन्नति के पद के समकक्ष वेतनमान का लाभ दिए जाने की मांग पर मंत्री द्वारा स्वास्थ्य विभाग को केन्द्र सरकार के सेवा संबंधी प्रकरणों का नियमानुसार परीक्षण कर सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि राज्य की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते राज्य सरकार की मंशा पर्वतीय एवं दुर्गम क्षेत्रों में ग्रामीण जनता को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराना है। स्वास्थ्य उपकेन्द्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए फार्मेसी अधिकारी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को स्वास्थ्य उपकेन्द्रों के लिए पूर्व में सृजित 391 फार्मेसी अधिकारी पदों के प्रस्ताव उपलब्ध कराने को कहा है।
श्री उनियाल ने प्रदेश में फार्मेसी प्रैक्टिस रेगुलेशन-2015 के प्रावधानों को लागू करने तथा चिकित्सकों की अनुपस्थिति में निर्धारित औषधियां उपलब्ध कराने के लिए फार्मेसी अधिकारियों को अधिकृत किए जाने के सम्बन्ध में एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिये।
चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री ने फार्मेसी अधिकारियों के विगत चारधाम यात्रा ड्यूटी के लंबित देयकों के भुगतान न किए जाने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए विभाग को कार्यशैली में सुधार लाने के निर्देश देते हुए 15 दिन के भीतर सभी लम्बित देयकों का भुगतान करने के निर्देश दिये गये। उन्होंने कहा कि फार्मेसी अधिकारी स्वास्थ्य सेवाओं की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और उनकी जायज समस्याओं का नियमानुसार समाधान सुनिश्चित किया जाए।
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