रुद्रपुर , अप्रैल 04 -- उत्तराखंड के रुद्रपुर में सामने आये फर्जी एनसीईआरटी पाठ्य पुस्तक प्रकरण में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने गिरोह के मुख्य सरगना को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है।
यह प्रकरण कुछ दिन पहले सामने आया था। पुलिस ने रुद्रपुर के एक गोदाम से करोड़ों रुपए की फर्जी किताबें पकड़ीं थी। इसके बाद पुलिस ने विगत 17 मार्च को एनसीईआरटी नई दिल्ली के सहायक उत्पादन अधिकारी दीपक कुमार की तहरीर पर कोतवाली रुद्रपुर में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
जांच के पता चला कि इस पूरे प्रकरण में एक अंतर्राज्यीय गिरोह शामिल है। नफीस खान इस गिरोह का मुख्य सरगना है। वहअपने साथियों के साथ मिलकर फर्जी एनसीईआरटी पुस्तकों का बड़ा नेटवर्क चला रहा था। गिरोह विभिन्न राज्यों में गोदाम किराये पर लेकर नकली किताबों का भंडारण करता था। बरेली से पुस्तकों को रुद्रपुर के कीरतपुर स्थित गोदाम में रखा जाता था जबकि इनके कवर की छपाई मथुरा की प्रिंटिंग प्रेस में कराई जाती थी। इसके बाद तैयार माल को राजस्थान के भरतपुर स्थित गोदामों में भेजकर अलग-अलग स्थानों पर भेजा जाता था।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी परिवहन के लिए वाहन मालिकों से संपर्क करता था और गोदामों के किराये का भुगतान भी स्वयं करता था, जिससे पूरे नेटवर्क का संचालन व्यवस्थित तरीके से किया जा रहा था।
पुलिस ने आरोपी नफीस खान (45) निवासी मेरठ (उत्तर प्रदेश) को गिरफ्तार कर लिया। उसे रूद्रपुर में न्यायालय में पेश किया गया।
जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी का आपराधिक इतिहास रहा है। उसके खिलाफ मेरठ और बरेली में धोखाधड़ी व कॉपीराइट उल्लंघन के कई मामले दर्ज हैं, जिनमें वह पहले जेल भी जा चुका है।
इस कार्रवाई में कोतवाली रुद्रपुर के प्रभारी निरीक्षक मनोज रतूड़ी, उपनिरीक्षक चन्दन सिंह बिष्ट समेत पुलिस टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस की इस सफलता से अवैध प्रकाशन और कॉपीराइट उल्लंघन के खिलाफ चल रही कार्रवाई को और मजबूती मिली है।
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