प्रयागराज , अगस्त 1 -- उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में फर्जी तरीके से आधार कार्ड बनाने और आधार अपडेट करने वाले नेटवर्क का खुलासा करते हुए साइबर क्राइम थाना पुलिस ने दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर क्लोनिंग और बाईपास तकनीक के जरिए दूसरे आधार ऑपरेटरों की यूजर आईडी और पिन का दुरुपयोग कर यूआईडीएआई सिस्टम में अनधिकृत रूप से लॉगिन करने का आरोप है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रतापगढ़ निवासी लवकुश यादव और फतेहपुर निवासी परमात्मा शरण उर्फ विवेक के रूप में हुई है।

पुलिस के अनुसार पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वर्ष 2020 से वे एक निजी कंपनी के माध्यम से फ्रेंचाइजी संचालित कर विभिन्न बैंकों में आधार ऑपरेटरों की नियुक्ति कराते थे। बैंकों के साथ कंपनी का अनुबंध समाप्त होने के बाद बड़ी संख्या में ऑपरेटरों की यूजर आईडी निष्क्रिय हो गई। इसके बाद उनका संपर्क ऐसे लोगों से हुआ, जो क्लोनिंग और बाईपास तकनीक के माध्यम से बंद यूजर आईडी को दोबारा सक्रिय कर देते थे।

जांच में सामने आया कि प्रत्येक आधार ऑपरेटर की यूजर आईडी सक्रिय करने के लिए प्रति सेशन 5,000 रुपये लिए जाते थे। इसके अतिरिक्त प्रत्येक आधार नामांकन या अपडेट के लिए 250 रुपये अलग से वसूले जाते थे।

पुलिस के अनुसार ऑपरेटर व्हाट्सएप के माध्यम से अपनी एनीडेस्क आईडी साझा करते थे। इसके बाद गैंग के सदस्य रिमोट एक्सेस लेकर सिस्टम में अनधिकृत लॉगिन करते और आधार कार्ड बनाने तथा अपडेट करने का कार्य करते थे।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से तीन एंड्रॉयड मोबाइल, एक आईफोन, चार सिम कार्ड, तीन लैपटॉप, दो की-बोर्ड, दो माउस, पांच हार्ड डिस्क, तीन एसएसडी, एक फिंगर स्कैनर, 19 चेकबुक, पासबुक, एटीएम कार्ड तथा तीन हिसाब-किताब की बहियां बरामद की हैं।

साइबर क्राइम थाना पुलिस ने बताया कि बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है, ताकि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और अवैध वित्तीय लेनदेन का पता लगाया जा सके। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि यह नेटवर्क केवल प्रयागराज तक सीमित नहीं है। पुलिस अब इस रैकेट से जुड़े अन्य आधार ऑपरेटरों, तकनीकी सहयोगियों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रही है।

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