फरीदकोट , मार्च 23 -- पंजाब के फरीदकोट में कर्ज से परेशान दो सगे भाइयों ने सोमवार को गांव ढाब ब्राह्मण वाला के पास छिंदवाड़ा एक्सप्रेस के आगे कूदकर जान दी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों भाई एक ही एक्टिवा पर सवार होकर रेलवे ट्रैक तक पहुंचे और एक-दूसरे का हाथ पकड़कर ट्रेन के आगे कूद गए। दोनों के टुकड़े-टुकड़े हुए। सूचना मिलते ही रेलवे पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दोनों शवों को कब्जे में लिया और पोस्टमॉर्टम के लिए फरीदकोट के मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया है। पुलिस परिजनों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।

मृतकों की पहचान गांव हरीनौ निवासी जसकरण सिंह (38) और उनके छोटे भाई जसविंदर सिंह उर्फ जोरा सिंह (34) के रूप में हुई है। दोनों किसान थे। दोनों के परिवारों में पत्नियों के अलावा एक-एक छोटी बच्ची हैं। जसकरण सिंह और जसविंदर सिंह पर लगभग 25 लाख रुपए का कर्ज था।

पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक इससे पहले कर्ज की रकम 50 लाख रुपए से भी अधिक थी और करीब तीन महीने पहले ही उन्होंने अपनी जमीन का एक हिस्सा बेचकर कुछ कर्ज उतारा था। करीब नौ महीने पहले दोनों भाइयों ने एक नया ट्रैक्टर भी खरीदा था, जिसकी किस्तों को लेकर वे परेशान चल रहे थे। हाल ही में आलू की फसल खराब हो जाने के कारण वे मानसिक रूप से भी काफी दबाव में आ गए। ट्रैक्टर की किश्तें न जा पाने से बार-बार बैंक का फोन आ रहा था। इसके अलावा बाकी कर्ज न चुका पाने से परेशान थे। इसके चलते आत्मघाती कदम उठा लिया।

पूर्व उपमुख्यमंत्री और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने पंजाब में किसानों की बिगड़ती हालत पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कर्ज न चुका पाने के कारण फरीदकोट में दो सगे भाइयों द्वारा आत्महत्या किए जाने पर गहरा शोक प्रकट किया और संबंधित बैंक अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

श्री रंधावा ने कहा कि पंजाब में किसानों की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है और उनकी शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि किसानों को अब तक न तो फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य मिला है और न ही बाढ़ से हुए नुकसान का मुआवजा।जब किसान अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरते हैं, तो पंजाब सरकार उन पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोलों से जवाब देती है।

सांसद रंधावा ने कहा कि देश का पेट भरने वाला किसान आज उपेक्षित है। घाटे की खेती के कारण वे ऊंचे ब्याज पर कर्ज लेने को मजबूर हैं। जब वे कर्ज नहीं चुका पाते, तो बैंक उन्हें प्रताड़ित करते हैं, जिससे तंग आकर वे आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाते हैं।

उन्होंने बताया कि फरीदकोट के दो भाइयों ने खेती के लिए 25 लाख का कर्ज लिया था, जो ब्याज के कारण बढ़कर 50 लाख हो गया। इस बोझ से परेशान होकर उन्होंने जान दे दी। उन्होंने अरविंद केजरीवाल के उस पुराने वादे की याद दिलाई जिसमें कहा गया था कि 1 अप्रैल के बाद पंजाब में कोई किसान खुदकुशी नहीं करेगा। एनसीआरबी के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि देश में सालाना औसतन 11,000 किसान आत्महत्या करते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अकेले पंजाब में 2023 में लगभग 150 किसानों ने अपनी जान गंवाई।

उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है ।उन्होंने प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को रद्द करने की भी मांग की और कहा कि कांग्रेस देश भर के किसानों के साथ मिलकर इसका विरोध करेगी।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित