, Sept. 5 -- श्री झा ने कहा कि फरक्का जल संधि के मुताबिक शुष्क मौसम (एक जनवरी से 31 मई) में जब बक्सर के पास गंगा का प्रवाह महज 400 क्यूमेक (लगभग 14 हजार क्यूसेक) रह जाता है, तब भी फरक्का से बांग्लादेश के लिए 1500 क्यूमेक (लगभग 53 हजार क्यूसेक) पानी छोड़ना पड़ता है। इसका मतलब है कि गंगा के अलावा बिहार की आंतरिक नदियों से भी पानी खींचकर बांग्लादेश को दिया जा रहा है। उन्होंने इसे बिहार के साथ अन्याय करार दिया।
जदयू नेता ने कहा कि बिहार और केंद्र की तत्कालीन सरकारों में बैठे लोगों ने बिहार के हितों की बलि चढ़ा दी। उन्होंने कहा कि यह नहीं सोचा गया कि इससे बिहार के किसानों की सिंचाई, लोगों के पेयजल, उद्योगों की पानी की जरूरत, लाखों लोगों की आजीविका और राज्य के युवाओं का भविष्य प्रभावित होगा।
जदयू पदेश अध्यक्ष श्री कुशवाहा ने इस असवर पर कहा कि जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार शुरू से कहते रहे हैं कि फरक्का बराज और फरक्का जल संधि से बिहार को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। एक ओर फरक्का बराज के कारण गंगा में भारी गाद जमा होने से नदी का तल ऊंचा हो गया है, जिसके कारण उत्तर बिहार को हर वर्ष बाढ़ का सामना करना पड़ता है। दूसरी ओर फरक्का जल संधि के कारण शुष्क मौसम में बिहार के हिस्से का पानी बांग्लादेश को देना पड़ता है, जिससे राज्य के कई जिलों में सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
श्री कुशवाहा ने कहा कि इस अंतरराष्ट्रीय संधि का 73 प्रतिशत बोझ अकेले बिहार उठा रहा है। यह बिहार के साथ ज्यादती है और पार्टी इस अभियान के माध्यम से लोगों को इसके बारे में जागरूक करना चाहती है।
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