मुंबई , अक्टूबर 12 -- महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे आंदोलन के ज़रिए देश पर वामपंथी चरमपंथी विचारधारा थोपने के लिए उच्चतम न्यायालय जैसी संस्थाओं को कमज़ोर करने की कोशिश कर रहे हैं।

श्री फडणवीस ने आज यहां संवाददाताओं से कहा, "वे कहते हैं कि वे उच्चतम न्यायालय तक मार्च करेंगे और मुख्य न्यायाधीश को उनका बयान स्वीकार करना चाहिए और उनसे बातचीत भी करनी चाहिए। संविधान में ऐसा कहां लिखा है?" उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय कार्यपालिका और विधायिका से अलग है, इसलिए उच्चतम न्यायालय किसी के भी बयान स्वीकार नहीं कर सकता।

मुख्यमंत्री ने कहा, "उच्चतम न्यायालय पर दबाव बनाने की जानबूझकर कोशिश की जा रही है। मेरा सवाल है कि संविधान में कहां लिखा है कि मुख्य न्यायाधीश को प्रदर्शनकारियों के बयान स्वीकार करने चाहिए? क्या यह भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा तैयार किये गये संविधान में है? भारतीय संविधान के अनुसार क्या उच्चतम न्यायालय का इस तरह अपमान किया जा सकता है? मैं जानना चाहता हूं।"श्री फडणवीस ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने ऐसी मांगें करके जो किया है, वह पूरी तरह से संविधान-विरोधी है, "वे संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने के लिए ही अपने हाथों में संविधान लेकर चलते हैं। वे यह दिखाना चाहते हैं कि उच्चतम न्यायालय, कैग, आरबीआई जैसी सभी संवैधानिक संस्थाएं बेकार हैं।" श्री फडणवीस ने आरोप लगाया कि विपक्ष लोगों को यह आभास दिलाने की कोशिश कर रहा है कि संवैधानिक संस्थाएं न्याय नहीं दे सकतीं।

उन्होंने आराेेप लगाया, "आखिरकार वे कहेंगे कि संविधान को बदलना होगा। वे देश पर वामपंथी चरमपंथी विचारधारा थोपना चाहते हैं। श्री राहुल गांधी और विपक्ष संविधान को कमज़ोर करने का काम कर रहे हैं।" उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर उच्चतम न्यायालय और मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ़ तरह-तरह के अपशब्दों का इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने कहा, "वे उच्चतम न्यायालय को भी कमज़ोर करने की कोशिश कर रहे हैं और इसके पीछे का मकसद डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा तैयार किये गये संविधान को नकारना है।" उन्होंने दावा किया और दोहराया कि यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस ने संविधान को कमज़ोर करने की कोशिश की है।

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