मुंबई , जुलाई 23 -- नीट परीक्षा का पेपर लीक होने के विवाद पर चल रही राजनीतिक खींचतान के बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को चुनौती दी कि विपक्षी दल राजनीतिक फायदे के लिए छात्रों का इस्तेमाल करने के बजाय सड़कों पर विरोध-प्रदर्शन छोड़ें और संसद में सार्थक बहस करें।

श्री फडणवीस ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साहस और लोकतंत्र एवं संविधान के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष संसद में इस मुद्दे पर बहस से क्यों बच रहा है। उन्होंने कहा कि उनकी यह हिचकिचाहट असल में बेनकाब हो जाने के डर की वजह से है। पिछली प्रशासनिक नाकामियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कर्नाटक, तेलंगाना और राजस्थान जैसे राज्यों में कांग्रेस की सरकारों के दौरान कई बार पेपर लीक हुए और पंजाब में आप सरकार के समय भी ऐसी ही घटनाएं हुईं। उन्होंने विपक्ष को चेतावनी दी कि वे छात्रों का इस्तेमाल राजनीतिक मोहरे के रूप में न करें।

विपक्ष के विरोध को खारिज करते हुए श्री फडणवीस ने उन पर छात्रों के कल्याण के प्रति कोई वास्तविक चिंता न होने का आरोप लगाया और कहा कि उनके आंदोलन का मकसद रचनात्मक सुझाव या समाधान देने के बजाय केवल राजनीतिक हित साधना है।केंद्र सरकार के कदम का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दोषियों को सज़ा देने के लिए फ़ास्ट-ट्रैक अदालत गठन किये जाने जैसे कड़े कदम उठाये हैं, साथ ही यह भी सुनिश्चित किया है कि नीट की दोबारा परीक्षा सुचारू रूप से हो जिससे भविष्य की परीक्षाओं का रास्ता साफ़ हो सके।

पिछली सरकारों से तुलना करते हुए उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा बजट कांग्रेस के कार्यकाल में 8,000 करोड़ रुपये से बढ़कर मोदी सरकार में 1,39,000 करोड़ रुपये हो गया है, जिससे एम्स और आईआईटी जैसे प्रमुख संस्थानों का दायरा बढ़ा है।

श्री फडणवीस ने विपक्ष के नेताओं से कायरता छोड़कर संसदीय कार्यवाही में हिस्सा लेने का आग्रह करते हुए फिर कहा कि छात्रों का वास्तविक कल्याण सड़कों पर राजनीतिक दिखावे के बजाय रचनात्मक नीतिगत बातचीत से ही हो सकता है।

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