नागपुर , अक्टूबर 23 -- महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल से जुड़ी एक ऑडियो क्लिप के जारी होने के समय पर सवाल उठाते हुए पूछा कि यह बातचीत ढाई साल बाद क्यों सामने आयी है।

श्री फडणवीस ने महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में अपना वोट डालने के बाद संवाददाताओं से कहा कि इस रिकॉर्डिंग की सच्चाई का न्यायिक तरीकों से पूरी तरह से पता लगाया जायेगा। इस रिकॉर्डिंग में आरोप लगाया गया है कि शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे के जरिए जरांगे को 500 करोड़ रुपये दिये गये थे। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना दोनों ने ही इस मामले की जांच की मांग की है। जरांगे ने भी इस मामले की जांच की मांग की है।

उन्होंने इतने लंबे समय के बाद इस बातचीत को जारी करने के मकसद पर सवाल उठाया और पूछा कि आखिर किसे निशाना बनाया जा रहा है और इसके पीछे क्या उद्देश्य है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि रिकॉर्डिंग की विस्तृत जांच के बाद सच्चाई सामने आ जायेगी।

यह विवाद तब शुरू हुआ जरांगे ने गुरुवार को एक ऑडियो क्लिप जारी की। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके मराठा आरक्षण आंदोलन को कमजोर करने और उनके प्रभाव को कम करने की साजिश रची गई थी। रिकॉर्डिंग में यह दावा किया गया है कि श्रीकांत शिंदे के जरिए उन्हें 500 करोड़ रुपये दिये गये थे। रिकॉर्डिंग की सच्चाई और इसमें लगाये गये आरोपों की अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

पूर्व शिवसेना सांसद राहुल शेवाले ने आरोप लगाया कि यह विवाद एक राजनीतिक साजिश का हिस्सा है, जिसका मकसद 'महायुति' सहयोगियों के बीच मतभेद पैदा करना और मुख्यमंत्री तथा उपमुख्यमंत्री की छवि को नुकसान पहुंचाना है।

इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा कि क्लिप की सच्चाई का पता लगाया जाना चाहिए। साथ ही इसके जरिए राजनीतिक नेताओं को बदनाम करने की किसी भी कोशिश की भी जांच होनी चाहिए।

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