मुंबई , जुलाई 15 -- महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को घोषणा की कि प्रदेश भर के किसानों के 48,000 करोड़ रुपये के बकाया बिजली बिल माफ कर दिये गये हैं।
श्री फडणवीस ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, "कुछ लोगों ने कभी नहीं सोचा था कि किसानों के कर्ज माफ होंगे, लेकिन इस सरकार के मन में किसानों का कल्याण था और उसने किसानों के कर्ज माफ कर दिये"। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार 7.5 हॉर्सपावर तक के कृषि पंपों के सभी पुराने बिजली बिलों को पूरी तरह से माफ कर देगी। इस पहल का उद्देश्य किसानों को एक "नयी शुरुआत" देना है, ताकि नये बिजली कनेक्शन लेते समय उन पर बिजली बिल के पुराने बकाये का बोझ न रहे।
श्री फडणवीस ने कहा कि बिजली के बिल माफ करने का मतलब यह नहीं है कि बिजली वितरण कंपनी को नुकसान उठाना पड़ेगा। महाराष्ट्र सरकार बजट से हर साल 25,000 करोड़ रुपये बिजली वितरण कंपनी को भुगतान करेगी। वर्तमान में राज्य के 76 प्रतिशत किसानों को दिन के समय बिजली उपलब्ध करायी जा रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि 100 प्रतिशत किसानों को बिजली मिले। उन्होंने वादा किया कि आने वाले दिनों में राज्य के सभी किसानों को दिन में 8 से 12 घंटे पूरी तरह से मुफ्त बिजली दी जायेगी। इससे पहले उनकी सरकार ने ऋण योजना को लागू करते समय शुरू में कुछ शर्तें लगायी थीं, जिसमें 2 लाख रुपये तक की पूर्ण ऋण माफी और नियमित ऋण चुकाने वालों के लिए 50,000 रुपये का प्रोत्साहन अनुदान शामिल था। विधायकों के आग्रह पर इन शर्तों को भी हटा दिया गया है।
श्री फडणवीस ने कहा कि वित्तीय अनुशासन लागू करने के लिए, जिन लोगों ने 2019 की ऋण माफी का लाभ उठाया था, उन्हें नयी योजना से बाहर रखा गया था।उन्होंने कहा कि सरकार ने पाया कि विधायक सही थे और उन्होंने उस शर्त को हटा दिया जिसने किसानों को बाहर रखा था। इसका मतलब है कि 12 लाख किसान जो पुरानी योजना के तहत पात्र थे, लेकिन बाद में लोन न चुका पाने की वजह से डिफॉल्टर हो गए थे, उन्हें भी 2 लाख रुपये की ऋण माफी का लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा, "इस वर्ष, 'अल नीनो' प्रभाव के कारण किसानों को सूखे का सामना करना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में, विधायकों ने ध्यान दिलाया कि 50,000 रुपये प्रोत्साहन के रूप में प्राप्त करने के लिए चालू वर्ष का ऋण चुकाने की अनिवार्यता की शर्त अनुचित है। इसलिए, इस शर्त को भी हटा दिया गया है। अब, उन सभी किसानों को 50,000 रुपये का लाभ मिलेगा जिन्होंने पिछले तीन वर्षों में से किन्हीं दो वर्षों में नियमित रूप से भुगतान किया है"।
श्री फडणवीस ने स्पष्ट किया कि ऋण माफी कृषि समस्याओं का अंतिम समाधान नहीं है। उन्होंने कहा, "ऋण माफी किसानों को स्थायी रूप से कर्ज के चंगुल से मुक्त नहीं करती है। यदि कृषि को एक उद्योग के रूप में लाभदायक बनाना है, तो नयी तकनीक और निवेश आवश्यक हैं। इसके लिए राज्य सरकार अगले दो-तीन वर्षों में राज्य में 50,000 'सामूहिक खेती' समूह बनायेगी और उन्हें सभी आवश्यक योजनाएं तथा धन उपलब्ध करायेगी।
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