यूएनओ , अक्टूबर 19 -- संयुक्त राष्ट्र की संस्था 'विश्व खाद्य कार्यक्रम' (डब्ल्यूएफपी) ने सोमवार को घोषणा की कि बजट में भारी कमी के कारण वह युद्धग्रस्त गाजा में पांच लाख फिलिस्तीनियों को दी जाने वाली मासिक सहायता बंद करने जा रहा है।
संस्था ने माना है कि गाजा में मानवीय सहायता की सख्त जरूरत के बावजूद उसे यह कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ रहा है।कटौती के इस फैसले के बाद अब गाजा के लगभग 11 लाख फिलिस्तीनियों (जो वहां की कुल आबादी का करीब आधा हिस्सा हैं) को हर महीने संयुक्त राष्ट्र की इस एजेंसी से खाद्यान्न या नकद मदद मिल सकेगी और उसकी मात्रा भी घटा दी गई है।
विश्व खाद्य कार्यक्रम ने बताया कि पिछले वर्ष गाजा में पड़े अकाल के प्रभाव को कम करने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी, हालांकि इजरायल अकाल की बात से इनकार करता रहा है। एजेंसी ने आगाह किया कि गाजा के हालात अभी इतने नहीं सुधरे हैं कि वहां से राहत सामग्री हटाई जा सके।
पिछले वर्ष अगस्त में संयुक्त राष्ट्र के 'इंटीग्रेटेड फूड सिक्योरिटी फेज क्लासिफिकेशन' ने गाजा में भुखमरी और अकाल के हालात की पुष्टि की थी। सात अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद से गाजा की घेराबंदी करने वाले और वहां लगातार हमले करने वाले इजरायल ने इस रिपोर्ट को झूठ करार दिया था।
अमेरिका की मध्यस्थता से गाजा में युद्धविराम लागू होने के दो महीने बाद, दिसंबर में अकाल की श्रेणी को हटा लिया गया था। युद्धविराम के बाद से डब्ल्यूएफपी अपनी राहत सामग्री का दायरा बढ़ाने में सफल रहा था और हर महीने 15 लाख से 18 लाख लोगों तक सहायता पहुंचा रहा था।सहायता पाने वाले लोगों की संख्या घटाने के साथ-साथ डब्ल्यूएफपी ने राशन सामग्री की मात्रा भी कम कर दी है।
डब्ल्यूएफपी के एक परिचालन नोट के अनुसार, खाद्य सहायता पाने वाले परिवारों को अब दो पार्सल के स्थान पर केवल एक ही पार्सल मिलेगा और गेहूं के आटे की बोरी का वजन भी घटा दिया गया है। इसके अलावा नकद सहायता पाने वाले 75,000 परिवारों की मासिक वित्तीय मदद 1,250 शेकेल से घटाकर 750 शेकेल (करीब 400 डॉलर से घटाकर 240 डॉलर) कर दी गई है।
डब्ल्यूएफपी को विभिन्न देशों की सरकारों और निजी दानदाताओं से फंड मिलता है। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में लौटने के बाद संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों और द्विपक्षीय मदद के बजट में भारी कटौती की गई, जिससे संस्था के संसाधनों में भारी गिरावट आई है।
एजेंसी का कहना है कि अगले छह महीनों में गाजा और पश्चिमी तट में राहत कार्यों के लिए उसे करीब 45 करोड़ डॉलर की जरूरत है, लेकिन वर्ष 2026 में फिलिस्तीनी क्षेत्रों के लिए उसे सामान्य से आधा फंड ही मिल सका है। इससे पहले सितंबर में भी एजेंसी ने 1967 से इजरायली कब्जे वाले पश्चिमी तट में सहायता पाने वालों की संख्या चार लाख से घटाकर 2 लाख कर दी थी।
डब्ल्यूएफपी का कहना है कि हालांकि गाजा में स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ है, लेकिन सर्दी का मौसम शुरू होने के साथ वहां राहत सामग्री की मांग फिर तेजी से बढ़ सकती है। युद्धविराम की शर्तों के तहत इजरायल ने गाजा में कुछ अधिक सामान ले जाने की अनुमति तो दी है, लेकिन सैन्य इस्तेमाल की आशंका जताते हुए कई तरह के प्रतिबंध लागू रखे हैं।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार इजरायल ने कृत्रिम अंगों की खेप तक रोक दी है। गाजा युद्ध के बाद से इजरायल ने संयुक्त राष्ट्र की आलोचना और तेज कर दी है। इजरायल का आरोप है कि यह वैश्विक संस्था पक्षपाती है और फिलिस्तीनियों को हमेशा दूसरों पर निर्भर बनाए रखना चाहती है।
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