मनेंद्रगढ़ , फरवरी 05 -- छत्तीसगढ के मनेंद्रगढ़ जिले की ग्राम पंचायत चनवारीडांड में संचालित प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाई ने पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और स्थानीय आजीविका को बढ़ावा देने का एक अनूठा मॉडल पेश किया है।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह ने गुरुवार को इस इकाई के निरीक्षण के दौरान इसकी कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए इसे स्वच्छ भारत मिशन के लक्ष्यों का जीवंत उदाहरण बताया।

जिला जनसंपर्क अधिकारी से मिली जानकारी के मुताबिक इस इकाई के तहत जिला पंचायत मनेंद्रगढ़ की ग्राम पंचायतों एवं शहरी क्षेत्रों के एसआरएलएम केंद्रों से प्लास्टिक कचरे का नियमित संग्रह किया जाता है। नगर निकायों के साथ हुए अनुबंध के आधार पर यह कचरा चनवारीडांड स्थित इकाई तक लाया जाता है, जहाँ उसे छांटकर और पिसकर श्रेडर प्लास्टिक में तब्दील किया जाता है। इस श्रेडर प्लास्टिक का उपयोग प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क निर्माण में किया जा रहा है।

अब तक लगभग 2600 किलोग्राम श्रेडर प्लास्टिक सड़क निर्माण के लिए पीएमजीएसवाई को आपूर्ति की जा चुकी है, जबकि 450 किलोग्राम श्रेडर प्लास्टिक वर्तमान स्टॉक में मौजूद है। इस पहल के कई लाभ सामने आए हैं। एक ओर जहाँ प्लास्टिक कचरे से होने वाली गंदगी में कमी आई है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं और महिला स्वसहायता समूहों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा गया है।

सचिव भीम सिंह ने इस इकाई को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए स्वच्छ भारत कोष के तहत इसे एक पूर्ण विकसित मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे जिले में प्लास्टिक अपशिष्ट के वैज्ञानिक निपटान को बड़ा आधार मिलेगा और अधिक महिलाओं को रोजगार से जोड़ा जा सकेगा। उन्होंने यह भी घोषणा की कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में जिले में बनने वाली सभी सड़कों में श्रेडर प्लास्टिक के अनिवार्य उपयोग का प्रावधान किया जाएगा।

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