नयी दिल्ली , जून 29 -- केद्र सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय (ओपीएसए) ने विभिन्न क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी के स्तर (टीआरएल) के आकलन की मानक व्यवस्था करने के लिए सोमवार को 'टीआरएल कम्पास' प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया।
ओपीएसए की ओर से जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार यह प्लेटफॉर्म विश्व स्तर पर स्वीकृत नौ-स्तरीय टीआरएल स्केल को भारत के अनुसंधान और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप बनाता है और सार्वजनिक वित्त पोषण वाली परियोजनाओं के मूल्यांकन के लिए एक सामान्य राष्ट्रीय मानक प्रदान करता है। इसे भारतीय डेटा सुरक्षा परिषद (डीएससीआई) के सहयोग से विकसित किया गया।
ओपीएसए की वैज्ञानिक सचिव डॉ. परविंदर मैनी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारतीय नवाचारों को प्रयोगशाला से बाजार तक पहुंचने में कठिनाई होती है क्योंकि प्रौद्योगिकी परिपक्वता का आकलन करने का कोई सर्वमान्य तरीका नहीं है। उन्होंने कहा कि टीआरएल कंपास एक साझा और वस्तुनिष्ठ ढांचा प्रदान करता है जो शिक्षा जगत, उद्योग और वित्तपोषण एजेंसियों को एक मंच पर लाएगा, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को आसान बनाएगा और वास्तविक दुनिया के परिणामों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने को प्रोत्साहित करेगा।
उद्घाटन समारोह ओपीएसए के वैज्ञानिक सचिव डॉ. मैनी, एएनआरएफ के सीईओ डॉ. शिवकुमार कल्याणरमन, नैसकॉम की वरिष्ठ उपाध्यक्ष और सीएसओ संगीता गुप्ता और ओपीएसए, डीएससीआई और सीएसआईआर के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। विज्ञप्ति में कहा गया है, टीआरएल कंपास अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ) और अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) कोष जैसी प्रमुख राष्ट्रीय पहलों के प्रभावी कार्यान्वयन में सहयोग प्रदान करेगा। इसमें स्वास्थ्य सेवा एवं फार्मास्यूटिकल्स तथा सॉफ्टवेयर के लिए क्षेत्र-विशिष्ट परिशिष्ट शामिल हैं, जो डोमेन-विशिष्ट मूल्यांकन को सक्षम बनाते हैं। यह प्लेटफॉर्म परियोजना मूल्यांकन को व्यक्तिपरक निर्णय से बदलकर प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, गुणवत्ता और कार्यक्रम संबंधी तैयारियों के वस्तुनिष्ठ, दस्तावेजी मूल्यांकन में परिवर्तित करता है।
प्रोफेसर सूद ने कहा कि भारत के विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए, देश की वैज्ञानिक क्षमता का आकलन अनुसंधान को व्यावहारिक और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य प्रौद्योगिकियों में परिवर्तित करने की उसकी क्षमता से किया जाएगा। उन्होंने प्रौद्योगिकी तत्परता का आकलन करने, सार्वजनिक निवेश को निर्देशित करने और व्यावसायीकरण को समर्थन देने के लिए एक साझा ढाँचे की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने संस्थानों को प्रौद्योगिकी के वित्तपोषण, समीक्षा और विकास के लिए मानक ढाँचे के रूप में टीआरएल कम्पास को अपनाने की सलाह भी दी।
ओपीएसए के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी रोहित गुप्ता ने टीआरएल कंपास प्रस्तुत किया और बताया कि यह वैश्विक स्तर पर स्वीकृत प्रौद्योगिकी तत्परता स्तर (टीआरएल) पद्धति को भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप कैसे ढालता है। उन्होंने देश में राष्ट्रीय अनुसंधान और गहन प्रौद्योगिकी पहलों के विस्तार के संदर्भ में इसके महत्व पर भी प्रकाश डाला।
डीएससीआई के सीईओ विनायक गोडसे ने कहा कि डीएससीआई लंबे समय से प्रौद्योगिकी पूर्वानुमान, क्षितिज विश्लेषण और क्षमता मानचित्रण के माध्यम से उभरती प्रौद्योगिकियों को समझने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। उन्होंने गहन प्रौद्योगिकी अनुसंधान और नवाचार में भारत के बढ़ते निवेश का स्वागत किया और इस बात पर जोर दिया कि इन महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए प्रौद्योगिकी तत्परता का आकलन करने हेतु एक मजबूत ढांचा आवश्यक है, जिससे टीआरएल कंपास एक सामयिक पहल बन जाती है।
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