बागपत , अक्टूबर 21 -- मरने के बाद भी जिया जा सकता है, बागपत जिले की प्रेमवती जैन ने नश्वर शरीर छोड़ने के बाद भी उन्होंने दो नेत्रहीनों के अंधेरे जीवन में उजाला भर दिया।

दरअसल, बुधवार को उत्तर प्रदेश के बागपत में कस्बा अग्रवाल मंडी टटीरी निवासी श्रीमती प्रेमवती जैन धर्मपत्नी स्व. आनंद कुमार जैन का निधन हो गया। अंतिम समय में भी उनकी इच्छा थी कि उनके जाने के बाद उनकी आंखें किसी और आँखों से दिव्यांग व्यक्तियों के माध्यम से दुनिया देख सकें।

उनके शरीर छोड़ने के तुरंत बाद परिजनों ने उनकी इस अंतिम इच्छा को पूरा किया। उनके सुपुत्र राकेश कुमार जैन एवं संजय कुमार जैन ने दृष्टिदूत एमजेएफ लायन अभिमन्यु गुप्ता से संपर्क कर नेत्रदान की इच्छा जताई। सूचना पर अभिमन्यु गुप्ता के प्रयास से सुभारती मेडिकल कॉलेज के नेत्र बैंक की टीम डॉक्टर आशीष त्यागी के नेतृत्व में पहुंची और नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की।

नेत्र बैंक की टीम ने दो नेत्रहीन व्यक्तियों को बुलाकर कॉर्निया ट्रांसप्लांट किया। ट्रांसप्लांट सफल रहा और दो लोगों की जिंदगी से अंधेरा हमेशा के लिए दूर हो गया। टीम में शामिल चिकित्सकों ने बताया, यह अभिमन्यु गुप्ता के प्रयासों से कराया गया 63वां नेत्रदान है।

स्व. प्रेमवती जैन के इस महादान की पूरे कस्बे में सराहना हो रही है। लोग कह रहे हैं कि उन्होंने मर कर भी अमर होने का रास्ता दिखाया है। दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि देने सतीश जिंदल प्रधान आर्य समाज, संजय कुमार जैन अध्यक्ष जैन समाज, प्रमोद जैन, श्रेयांश जैन, दीपक गोयल सचिव लायंस क्लब, आयुष जैन, बबलू जैन, अतुल जिंदल, सचिन जैन, मनोज आर्या सभासद सहित समाज के सैकड़ों लोग पहुंचे और पुण्य आत्मा को नमन कर ईश्वर से अपने श्रीचरणों में स्थान देने की प्रार्थना की।

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