बेंगलुरु , जून 15 -- कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत को एक पत्र लिखकर संगठन के कानूनी ढांचे , वित्त , सम्पतियां और कर अनुपालन क्रियाकलाप का विवरण मांगा है। उन्होंने कहा कि कोई भी संगठन चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, एक संवैधानिक लोकतंत्र में जांच से परे नहीं रह सकता।
श्री खरगे ने संघ प्रमुख मोहन भागवत को लिखे एक पत्र में उस कानूनी आधार पर सवाल उठाया जिसके आधार पर संगठन बिना औपचारिक पंजीकरण के बड़े पैमाने पर काम कर रहा है, जबकि देश भर में हजारों शाखाएं और बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
मंत्री ने यह तर्क देते हुए कि कार्यकर्ता , धार्मिक संस्थाएं, गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) , ट्रस्ट, सोसाइटी और कंपनियां सभी पंजीकरण , ऑडिट और घोषणा नियम के तहत आते हैं। उन्होंने कहा कि आरएसएस को भी पारदर्शिता और जवाबदेही के उन्हीं मानकों पर रखा जाना चाहिए।
श्री खरगे ने आरएसएस से अपने संगठनात्मक ढांचे , पदाधिकारी , अनुदान और आय के स्रोत , खर्च, सम्पतियां , कर भुगतान और अपनी गतिविधियों को नियंत्रित करने वाले अनुपालन तंत्र का विवरण सार्वजिनक रुप से जनता के बीच रखने को कहा।
उन्होंने रूट मार्च, जनसभा और दूसरे आयोजित सुनियोजित कार्यक्रम के लिए मिली अनुमति और अधिकार पर भी स्पष्टीकरण मांगा।
मंत्री ने कहा कि आरएसएस की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक कर्नाटक में संगठन की अच्छी-खासी उपस्थिति है, जिसमें 4,127 दैनिक शाखा, 1,389 साप्ताहिक मिलन और 60 मासिक मंडली हैं। यह भी दावा करता है कि उसने राज्य में 2,194 समाजोत्सव किए हैं जिनमें 19.61 लाख से ज़्यादा लोग शामिल हुए और 562 पथ संचलन किए हैं जिनमें 2.21 लाख से ज़्यादा पौशाक पहने लोग शामिल हुए।
श्री खरगे ने कहा, "एक संगठन जो नियमित तौर पर राष्ट्रवाद , अनुशासन और कर्तव्य का ज़िक्र करता है, उसे पारदर्शिता, अनुपालन और भारत के संविधान के सम्मान के ज़रिए इन मूल्यों को भी दिखाना चाहिए।"उन्होंने आरएसएस के सौ साल पूरे होने को बैकग्राउंड में रखते हुए संगठन से खुद को रजिस्टर करके, अपनी गतिविधियों और वित्त का खुलासा करके, सभी लागू कर का भुगतान करके और भारतीय कानून के तहत एक पारदर्शी और जिम्मेदार निकाय के तौर पर काम करके, "संवैधानिक आत्ममंथन'' करने की अपील की।
श्री खरगे ने कहा कि वह आरएसएस से औपचारिक जवाब का इंतज़ार कर रहे हैं और उन्होंने आग्रह किया कि उठाए गए मुद्दों पर चर्चा के लिए उसके अधिकृत पदाधिकारी को भेजा जाए।
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