दरभंगा , सितंबर 30 -- ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ कृष्णकांत झा ने कहा कि प्राच्य विद्या के आलोक में भारतीय राजनीति को समझना केवल समकालीन घटनाक्रमों का विश्लेषण नहीं, बल्कि भारत की सहस्राब्दियों पुरानी राजनीतिक चेतना को समझना है, जिसकी छाप आज भी देश के लोकतांत्रिक ढांचे और जनमानस पर है।डॉ झा ने बुधवार को विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर राजनीतिशास्त्र विभाग एवं डॉ प्रभात दास फाउंडेशन, दरभंगा के संयुक्त तत्वावधान में "प्राच्य विद्या के आलोक में भारतीय राजनीति" विषय पर आयोजित एक दिवसीय सेमिनार को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि प्राचीन भारतीय राजनीतिक दर्शन में राजत्व, न्याय, प्रशासन और शासन व्यवस्था से संबंधित मूलभूत सिद्धांतों का विस्तृत विवेचन मिलता है। बृहस्पति के लेखन, कौटिल्य के अर्थशास्त्र, वाल्मीकि रामायण एवं महाभारत जैसे ग्रंथ इसके महत्वपूर्ण स्रोत हैं।उन्होंने कहा कि इन ग्रंथों में शासक के अधिकार, राज्य के दायित्व तथा कानून, नैतिकता और शासक के कर्तव्यों के व्यावहारिक एवं नैतिक पक्षों पर गंभीर चिंतन मिलता है, जिसने प्राचीन भारतीय शासन व्यवस्था के बौद्धिक स्वरूप को आकार दिया।
अध्यक्षीय संबोधन में राजनीतिशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ.अनिल कुमार चौधरी ने कहा कि प्राच्य विद्या के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि भारतीय राजनीति अपने मूल स्वरूप में अध्यात्म और व्यावहारिकता का अनूठा समन्वय है। उन्होंने कहा कि आधुनिक भारत ने पश्चिमी कूटनीतिक एवं संवैधानिक ढांचे को अपनाया है, लेकिन भारतीय राजनीतिक चिंतन में प्राचीन मूल्यों की निरंतर उपस्थिति दिखाई देती है।
विषय प्रवेश करते हुए विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. मुनेश्वर यादव ने कहा कि प्राचीन भारतीय चिंतन में राजनीति को केवल सत्ता संघर्ष के रूप में नहीं, बल्कि राजधर्म के रूप में देखा गया। महाभारत के शांतिपर्व और कौटिल्य के अर्थशास्त्र में राजा का प्रमुख दायित्व प्रजा के कल्याण से जोड़ा गया है। उन्होंने प्राचीन एवं आधुनिक राजनीतिक चिंतन की तुलना करते हुए कहा कि वर्तमान कल्याणकारी राज्य की विभिन्न नीतियों में इस विचार की आधुनिक अभिव्यक्ति देखी जा सकती है।
फाउंडेशन के सचिव मुकेश कुमार झा ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ मनोज कुमार ने किया। मंच संचालन शोधार्थी नितीश कुमार ने किया। इस अवसर पर डॉ रघुवीर कुमार रंजन, डॉ नीतू कुमारी सहित शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।
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