पटना , अगस्त 29 -- िहार में इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा प्राकृतिक एवं जैव-विविधता से समृद्ध क्षेत्रों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में रोहतास जिला इको टूरिज्म के विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण संभावनाओं वाला क्षेत्र है। यहां प्रकृति की खूबसूरती, घने वन क्षेत्र, पहाड़ी भू-दृश्य, जलप्रपात, नदियां तथा समृद्ध ऐतिहासिक विरासत पर्यटकों को एक साथ आकर्षित करने की क्षमता रखते हैं।

रोहतास की पहचान केवल ऐतिहासिक धरोहरों तक सीमित नहीं है। कैमूर पर्वत श्रृंखला और इसके आसपास का वन क्षेत्र जिले को प्रकृति-आधारित पर्यटन के लिए विशिष्ट बनाता है। मानसून एवं उसके बाद का समय यहां के जलप्रपातों, हरित वन क्षेत्रों और प्राकृतिक परिदृश्यों को विशेष रूप से मनोरम बना देता है। प्रकृति प्रेमियों, फोटोग्राफी एवं बर्ड वॉचिंग के शौकीनों, ट्रेकिंग तथा एडवेंचर पर्यटन में रुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए रोहतास में व्यापक अवसर मौजूद हैं।

रोहतास के मांझर कुंड और तुतला भवानी जलप्रपात जैसे प्राकृतिक स्थल इको टूरिज्म की दृष्टि से विशेष महत्व रखते हैं। वर्षा ऋतु में जलप्रपातों की प्राकृतिक छटा पर्यटकों को आकर्षित करती है। इन स्थलों को पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए विकसित किया जाए तो स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं।

इसके साथ ही रोहतासगढ़ किला क्षेत्र की ऐतिहासिक एवं प्राकृतिक विशेषताओं का अनूठा संगम प्रस्तुत करता है। किले तक पहुंचने वाला पहाड़ी भू-दृश्य, आसपास का वन क्षेत्र तथा ऐतिहासिक महत्व इसे हेरिटेज टूरिज्म और इको टूरिज्म को एक साथ विकसित करने के लिए उपयुक्त बनाता है।

स्थानीय समुदाय की भागीदारी से विकसित होगा इको टूरिज्मइको टूरिज्म का उद्देश्य केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रकृति एवं जैव-विविधता का संरक्षण करते हुए स्थानीय समुदाय की आय में वृद्धि करना है। रोहतास में स्थानीय युवाओं को नेचर गाइड, टूर गाइड, होम-स्टे, स्थानीय परिवहन, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पादों एवं खान-पान से जोड़कर पर्यटन आधारित आजीविका के अवसर विकसित किए जा सकते हैं।

पर्यटन स्थलों पर स्वच्छता, ठोस कचरा प्रबंधन, सुरक्षित पथ, साइनेज, बैठने की व्यवस्था, पेयजल, शौचालय, पार्किंग तथा पर्यटकों की सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं के विकास से इन स्थलों की पर्यटक क्षमता में वृद्धि की जा सकती है। साथ ही, कैरीइंग कैपेसिटी और पर्यावरणीय मानकों का ध्यान रखते हुए पर्यटन गतिविधियों का संचालन किया जाना आवश्यक होगा।

रोहतास में इको टूरिज्म को केवल एकल पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के बजाय नेचर टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म, हेरिटेज टूरिज्म और ग्रामीण पर्यटन को एक समेकित सर्किट के रूप में विकसित किया जा सकता है। इससे पर्यटकों के ठहराव की अवधि बढ़ेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को व्यापक लाभ मिलेगा।

रोहतास की प्राकृतिक संपदा को संरक्षित रखते हुए यहां नेचर ट्रेल, व्यू प्वाइंट, बर्ड वॉचिंग जोन, इंटरप्रिटेशन सेंटर, इको-फ्रेंडली कैंपिंग तथा स्थानीय संस्कृति और खान-पान आधारित पर्यटन गतिविधियों की संभावनाओं का भी उपयोग किया जा सकता है।

राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि बिहार के प्राकृतिक क्षेत्रों को पर्यावरण संरक्षण के साथ पर्यटन के नए केंद्रों के रूप में विकसित किया जाए। रोहतास इस दिशा में एक महत्वपूर्ण संभावनाशील जिला है, जहां प्रकृति का संरक्षण, स्थानीय समुदाय का सशक्तीकरण और पर्यटन विकास एक-दूसरे के पूरक बन सकते हैं।

रोहतास,जहां इतिहास की विरासत और प्रकृति की खूबसूरती मिलकर बिहार के इको टूरिज्म को नई पहचान दे सकती है।

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